नगर निगम शिमला का चुनाव संबंधी मामला सुप्रीम कोर्ट में बंद हो गया है। इसके साथ अब एमसी चुनाव की तैयारियां शुरू होने लगी हैं। सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस मामले को वापस लेने के लिए चुनाव आयोग ने 3 फरवरी 2023 को आवेदन किया था। चुनाव आयोग के इस आवेदन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार अब इस मामले को बंद कर दिया है। चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट के वार्डों के पुन: सीमांकन मामले में दोबारा निर्णय लेने के आदेशों को चुनौती दी थी। मामले पर 5 दिसंबर 2022 को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल हाईकोर्ट के निर्णय पर रोक लगा दी थी।
मामले के अनुसार 24 फरवरी को जिलाधीश ने नाभा वार्ड के कुछ क्षेत्र फागली, टूटीकंडी में मिलाने और बालूगंज बाजार को बालूगंज वार्ड में न मिलाने का फैसला सुनाया था। अदालत ने इन आदेशों को 3 जून को पारित निर्णय के अनुसार खारिज कर दिया था। अदालत ने डीसी शिमला को आदेश दिए हैं कि वह वार्डों के पुन: सीमांकन मामले में दोबारा निर्णय लें। लेकिन डीसी शिमला ने 24 जून को दोबारा फैसला सुनाते हुए 24 फरवरी के आदेशों को सही ठहराया था। 21 सितंबर 2022 को हाईकोर्ट ने निर्णय देते हुए दोबारा से जिलाधीश की ओर से पारित 24 फरवरी के निर्णय को रद्द कर दिया था। अदालत ने अपने निर्णय में कहा था कि जिस आदेश को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था उसे डीसी शिमला ने सही बताया है। अदालत ने डीसी शिमला को आदेश दिए थे कि वह वार्डों के पुन: सीमांकन मामले में दोबारा निर्णय लें। हाईकोर्ट के इस निर्णय को राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
यह है डीसी शिमला का निर्णय
जिलाधीश शिमला ने नाभा, फागली, टूटीकंडी, समर हिल और बालूगंज वार्डों का पुन: सीमांकन कर फागली और टूटी कंडी वार्डों के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए नाभा वार्ड के क्षेत्र को कम कर दिया। पहले की अपेक्षा अब नाभा वार्ड आधा रह गया है। फागली वार्ड को इतना बड़ा कर दिया है कि नगर निगम के सभी वार्डों की अपेक्षा फागली वार्ड का क्षेत्र अधिक हो गया है। इसके अलावा बालूगंज वार्ड का वह क्षेत्र भी समरहिल में मिला दिया जोकि बालूगंज के नाम से ही जाना जाता है। याचिकाकर्ता सिमि नंदा ने उपायुक्त के 24 जून 2022 और मंडलीय आयुक्त के 8 जुलाई 2022 के आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने इन आदेशों को रद्द कर दिया था।