प्रदेश के जिला कुल्लू के बागवानों के लिए इस बार बरसात नुकसान पहुंचाने वाली रही। भूस्खलन से सड़कों के बंद होने के कारण बागवानों को सेब मजदूरों से ढुलवाना पड़ा।
हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के बागवानों के लिए इस बार बरसात नुकसान पहुंचाने वाली रही। भूस्खलन से सड़कों के बंद होने के कारण बागवानों को सेब मजदूरों से ढुलवाना पड़ा। जहां एक पेटी का किराया पांच रुपये लगता था वहीं पीठ पर ढुलाई के लिए 100 रुपये अदा करने पड़े।
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मुख्य सड़क पर सेब को पहुंचाकर वाहनों में मंडियों तक ले जाया गया। उसका किराया अलग से। भारी बरसात होने के कारण सेब का आकार और रंग नहीं बन पाया। इस कारण मंडियों में सेब के दाम नहीं मिल पाए। कई बागवानों को सेब की लागत तक नहीं मिल पाई, उल्टा अपनी जेब से धनराशि खर्च करनी पड़ी।
जिले की रघुपुरघाटी के बागवानों के लिए ढाई महीने बाद भी सड़कें नहीं खुल पाई है। इससे सेब की पेटियों को पीठ पर उठाकर मंडियों तक पहुंचाना पड़ रहा है। दुर्गम इलाकों की सड़कों के दुरुस्त न होने से बागवानों को सबसे अधिक खमियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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जिले की बंजार की तीन कोठी, तीर्थन, सैंज के अलावा बाह्य सराज की रघुपुर घाटी के बागवान पीठ पर सेब की पेटियां को उठाकर तक सड़कों तक पहुंचाने को मजबूर हैं। सड़कें दुरुस्त होतीं तो एक पेटी को किराया पांच रुपये तक देना पड़ता। पीठ पर ढोने के लिए एक पेटी का भाड़ा 20 गुना अधिक यानी 100 रुपये देना पड़ा है।