कैंसर अस्पताल में चल रही कैंटीन को लेकर अस्पताल प्रबंधन ने गंभीर सवाल उठाए हैं। एक स्वयंसेवी संस्था की ओर से लोगों के आर्थिक सहयोग से यह कैंटीन चलाई जा रही है। कैंटीन से मरीजों को निशुल्क चाय और दलिया दिया जाता है। एक साल से अधिक समय से यह कैंटीन यहां चल रही है। अस्पताल परिसर में बनी इस कैंटीन से प्रबंधन ने खुद को खतरा बताया है।
कैंटीन में रसोई गैस सिलेंडरों का इस्तेमाल होता है और कैंटीन अस्पताल से सटी है। किसी तरह के हादसे के दौरान यहां भारी तबाही हो सकती है। इतना ही नहीं विभागाध्यक्ष ने बिना परमिशन के कैंटीन के अवैध विस्तार पर भी सवाल उठाए हैं। इस बारे में विभागाध्यक्ष की ओर से लिखित में कॉलेज प्राचार्य को जानकारी दी है।
प्रबंधन का दावा है कि कैंटीन प्रदेश के एकमात्र क्षेत्रीय कैंसर अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की जान को खतरा हो सकता है। अस्पताल में बनी कैंटीन के रखे रसोई गैस सिलेंडर लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। दूसरी ओर अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित मशीनें कभी भी स्वाह हो सकती हैं।
प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में रोजाना औसतन 110 के करीब मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल में चल रही कैंटीन में रखे सिलेंडरों से निकल रही गैस से अनजाने में आग लग जाए तो भारी जानमाल की हानि होना तय है। यह प्रश्न बार-बार प्रबंधन के जहन में उठ रहा है कि अगर हादसा हो जाए तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा?
रेडिएशन की जगह चल रही कैंटीन
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कोबाल्ट मशीन जहां से रेडिएशन बाहर निकलता है वहां पर कैंटीन चल रही है। वहां संस्था ने बिना इजाजत के पानी के नलके लगा दिए हैं। नलकों की दिशा उस जगह है जहां पर मरीज के इलाज के लिए लगाई विकिरणें बाहर निकलती हैं। मरीजों के तीमारदार भी दीवार पर लगे नलकों से पानी पीते और बर्तन धोते हैं। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
कैंसर अस्पताल में चल रही कैंटीन को लेकर प्रबंधन ने बताया कि अल्माइटी बलैंसिंग संस्था की ओर से अस्पताल परिसर में प्रबंधन की इजाजत के बगैर ही वाटर टैंक, वाटर फिल्टर और नलके लगा दिए हैं। प्रबंधन ने कहा कि मरीजों के इलाज के लिए यहां पर अठारह करोड़ रुपये से नई मशीन लगनी है। लेकिन संस्था ने यहां पर छत लगाकर जगह को अपने कब्जे में ले रखा है। इसके चलते यहां पर मशीन लगाना कठिन है। प्रबंधन ने दावा किया है कि एईआरबी सुरक्षा एक्ट के तहत रेडिएशन जोन में इस तरह के अतिक्रमण को लेकर प्रशासन से उन्हें कार्रवाई करने को कहा है।
कैंसर अस्पताल के विभागाध्यक्ष ने बताया कि अल्माइटी बलैंसिंग संस्था ने छुट्टी वाले दिन आकर अस्पताल के रेडिएशन जोन में नलके लगा दिए हैं। रेडिएशन निकलने पर नलकों के पास खड़े होने पर बीमार होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। संस्था की ओर से किए जा रहे अतिक्रमण के बारे में प्रिंसिपल को लिखित में सूचना दे दी है।
-डा. राजीव के सीम प्रोफेसर एवं कैंसर अस्पताल विभागाध्यक्ष
नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई
आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल में अवैध कब्जों को लेकर लिखित में विभागाध्यक्ष ने शिकायत दी है। कहा कि अल्माइटी बलैंसिग संस्था कैंटीन की जगह के अलावा अस्पताल परिसर की दूसरी जगहों पर भी कब्जा कर रही है ऐसी सूचनाएं उनके पास आ रही हैं।
- डा. रमेश चंद वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक आईजीएमसी
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर डा. एसएस कौशल ने कहा कि अल्माइटी बलैंसिग संस्था को सख्त हिदायत दी जा रही है। अतिक्रमण किसी भी सूरत में बरदाश्त नहीं किया जाएगा। इस मुद्दे पर जल्द ही मीटिंग बुलाई जा रही है। इसमें सभी तथ्यों को सामने रखा जाएगा। विभागाध्यक्ष की ओर से मिली जानकारी को गंभीरता से लिया जा रहा है।
-डा. एसएस कौशल आईजीएमसी प्रिंसिपल शिमला
अल्माइटी बलेसिंग संस्था के संचालक सर्बजीत सिंह बॉबी ने बताया कि आईजीएमसी में कैंटीन चला रहे कुछ लोग अस्पताल प्रशासन के कान भर रहे हैं। निशुल्क में लोगों को खाना मिलने की वजह से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनकी संस्था नि:स्वार्थ भाव से जन सेवा कर रही है। उन पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। अतिक्रमण कहीं हो रहा है तो उसे हटा दिया जाएगा।