हिमाचल प्रदेश में प्राइवेट स्नातक करने पर पेच फंस गया है। एचपीयू के दूरवर्ती शिक्षण संस्थान (इक्डोल) की यूजीसी ने 2016 से मान्यता रोक दी है। 2018-19 के बैच को बिठाने पर रोक लगा दी है। अगर इक्डोल को मान्यता न मिली तो रूसा के तहत भी प्राइवेट स्नातक डिग्री हासिल नहीं हो सकेगी।
हालांकि प्रदेश विश्वविद्यालय ने इस संबंध में न्यायालय में याचिका दायर की है। इसमें बैच को बिठाने की अनुमति मांगी है। इक्डोल में पक्ष में फैसला आने पर ही नया बैच बिठाया जा सकता है। रूसा के तहत एचपीयू में सीबीसीएस के तहत प्राइवेट डिग्री करने का प्रावधान नहीं है।
दूरवर्ती शिक्षा संस्थान यूजी कोर्स करवाने के लिए पात्र थे। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 2013 में रूसा सीबीसीएस लागू करने के बाद प्रदेश की छात्राओं और आरक्षित वर्ग के छात्रों को न्यूनतम फीस पर यूजी डिग्री कोर्स इक्डोल से करने की सुविधा दी थी।
सामान्य वर्ग के छात्रों को भारी भरकम फीस चुकानी पड़ती थी। अब यूजीसी के डिस्टेंस एजूकेशन ब्यूरो (डीईबी) ने दूरवर्ती शिक्षण संस्थानों में नई शर्त लगा दी है। नैक ग्रेडिंग में 2.26 अंक होने पर ही दूरवर्ती मोड से यूजी डिग्री की पढ़ाई करवाई जा सकती है। नैक से ए ग्रेड प्राप्त एचपीयू के सिर्फ 2.21 प्वाइंट है। ऐसे में इक्डोल यह कोर्स नहीं करवा सकता।
यूजीसी की अनुमति, न्यायालय के फैसले से मिलेगी राहत- विवि के इक्डोल को यदि मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी से बैच बिठाने की अनुमति मिलती है, या न्यायालय में पक्ष में मामला आता है तो ही प्रदेश के हजारों युवाओं को राहत मिलेगी।
इक्डोल प्रशासन पूरी उम्मीद लगाए बैठा है कि समय रहते उन्हें इक्डोल से यूजी सहित पीजी कोर्स के नए बैच को बिठाने की अनुमति मिल जाएगी। कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान का कहना है कि यूजीसी से एचपीयू इक्डोल को विशेष छूट दे बैच बिठाने की अनुमति मिलने की उम्मीद है, वहीं न्यायालय से भी पक्ष में फैसला आने का भरोसा है।