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कैग रिपोर्ट में खुलासा, पैंशन देने में हो रहा बड़ा घपला

Thu, 14 Apr 2016 08:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला

सार

  • इंतजार कर रहे पात्र, अपात्रों को बांटा जा रहा पेंशन का पैसा
  • कैग रिपोर्ट में खुलासा, कोई पेंशन के लिए तरस रहा तो कहीं विधवा पेंशन में धांधली
  • आम जनता की राह में रोड़े, समय पर पेंशन का भुगतान नहीं कर रहे सरकार महकमे
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कहीं विधवा पेंशन देने में धांधली हो रही है तो कहीं पात्र पेंशन पाने के लिए इंतजार कर रहे हैं।
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विस्तार
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विधायकों की वेतन बढ़ोतरी हो या फिर उनकी पेंशन का मामला। हर मामले में उनकी समस्याओं का निवारण भी झटपट होता है और मांगों को बिना पल गंवाए मान लिया जाता है। ये जनसेवक जिस जनता की सेवा के नाम पर पेंशन और लाखों का वेतन हासिल कर रहे हैं, उस जनता का हाल बेहाल है।
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कैग रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि किस तरह जनता के तकरीबन हर वर्ग को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साल 2003 के बाद की नौकरी ज्वाइन करने वालों को पेंशन न देने का प्रावधान किया गया, लेकिन समाज के जिस वर्ग की पात्रता पेंशन के लिए बनी रही, उसे भी सही समय पर पेंशन नहीं मिल सकी।

कहीं विधवा पेंशन देने में धांधली हो रही है तो कहीं पात्र पेंशन पाने के लिए इंतजार कर रहे हैं। अपात्रों को पेंशन का पैसा बांटा जा रहा है। पेंशन जारी करने में भी सरकार और सरकारी सिस्टम रुचि नहीं दिखा रहा। यह तब है, जब सरकार अपने मंत्रियों, विधायकों और सीपीएस तथा पीएस का वेतन और पेंशन बढ़ाने के लिए तकरीबन हर दूसरे साल विधेयक सदन में लाकर उसे पास करा रही है।
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पैंशन को लेकर ये है कैग रिपोर्ट का खुलासा

कुछ जिलों में विभागों ने बैंकों को पैसा ही ट्रांसफर नहीं किया। इस वजह से पात्र लोग पेंशन का इंतजार करते रहे। - फोटो : demo pic
सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियमावली 2010 के अनुसार पेंशनरों को पेंशन हर तिमाही की शुरुआत में अग्रिम रूप में मनीऑर्डर या उनके बैंक खातों में पहुंच जानी चाहिए, लेकिन ऑडिट के दौरान पाया गया कि पैंतीस लाख से साढ़े सात करोड़ रुपये तक की पेंशन की राशि अधिकारियों के खातों में ही पड़ी रही। कुछ जिलों में विभागों ने बैंकों को पैसा ही ट्रांसफर नहीं किया। इस वजह से पात्र लोग पेंशन का इंतजार करते रहे।

80 साल से ऊपर के व्यक्तियों को पेंशन न देना
सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियमावली के नियम 7 में संशोधन किया और 80 साल से ऊपर की उम्र के लोगों के लिए नई श्रेणी बना दी। तय हुआ कि इस श्रेणी के हर व्यक्ति को 1000 रुपये प्रति माह पेंशन दी जाएगी, लेकिन ऑडिट में पता चला कि निदेशक  के अभिलेखों में इस श्रेणी के करीब बारह हजार पात्र व्यक्तियों को मार्च 2015 तक प्रतीक्षा सूची में रखा गया। मतलब, पेंशन के लिए इंतजार करवाया गया।
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पेंशन बांटने में भी कर दी गड़बड़ी

शीघ्र ही बच्चों के बैंक खाते में आरटीजीएस से स्कॉलरशिप की राशि जमा होगी।
पेंशन बांटने के लिए हुए समझौते के अनुसार विभाग को पेंशन वितरण के लिए बैंक को तीन प्रतिशत की दर से कमीशन का भुगतान करना था। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार ऊना जिले में 26.55 करोड़ की वास्तविक पेंशन वितरण राशि की बजाय 27.82 करोड़ की राशि साल 2009 जनवरी से सितंबर 2013 के बीच ट्रांसफर कर दी गई।

इसके चलते विभाग ने करीब 84 लाख रुपये बैंक को कमीशन के रूप में चुकाए। खास बात यह है कि बैंक ने साल 2014-15 में अतिरिक्त पेंशन राशि तो लौटा दी, लेकिन न तो विभाग ने गौर किया और न ही बैंक ने अतिरिक्त कमीशन के तौर पर ली राशि वापस की।

अपात्रों को बांट दी पेंशन
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार जिला कल्याण अधिकारी मंडी तथा ऊना ने साल 2012-15 के दौरान करीब चौदह लाख रुपये की राशि पेंशन के रूप में वितरित कर दी। खास बात यह है कि इस दौरान बिना पात्रता की जांच किए ही करीब 232 लोगों को पेंशन का वितरण कर दिया गया।
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