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धर्मशाला उपचुनाव: सुधीर के फैसले से गुटबाजी को नई हवा

Sat, 28 Sep 2019 01:04 PM IST
अरविन्द ठाकुर सुनील चड्ढा, अमर उजाला, धर्मशाला
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सुधीर शर्मा - फोटो : फाइल फोटो
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एआईसीसी सचिव एवं पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा के चुनाव न लड़ने के पीछे प्रदेश नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराने के बाद उपचुनाव के ऐन मौके पर कांग्रेस में फूट खुलकर सामने आ गई है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो सुधीर शर्मा ने कुछ पूर्व विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ मंथन कर उपचुनाव न लड़ने का निर्णय लेकर भविष्य की सियासी लकीर खींची है।

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सुधीर ने उपचुनाव न लड़ने के पीछे वर्तमान संगठनात्मक ढांचे को जिम्मेदार ठहराकर अपरोक्ष रूप से प्रदेशाध्यक्ष पर हमला बोला है। राजनीतिक विश्लेषक सुधीर के इस राजनीतिक स्ट्रोक को मिशन 2022 और भाजपा प्रत्याशी के रूप में उपचुनाव लड़ने जैसे सियासी समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। 

उधर, सुधीर शर्मा के भाजपा टिकट से उपचुनाव लड़ने की कथित अफवाह ने दिल्ली में टिकट के तलबगारों की पेशानी पर पसीना ला दिया। नए सियासी समीकरणों की वजह से शुक्रवार को भाजपा और कांग्रेस दोनों दल अपना प्रत्याशी घोषित नहीं कर पाए। माना जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस आज धर्मशाला से अपने प्रत्याशी घोषित कर सकते हैं।
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यानी, भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रत्याशी सोमवार को ही नामांकन दाखिल कर पाएंगे, पुख्ता हो गया है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कहा कि शनिवार को प्रत्याशी के नाम का ऐलान हो सकता है। नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रत्याशी पर निर्णय का फैसला हाईकमान के हाथ में है।

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विजयइंद्र दिल्ली बुलाए, रघुवीर का नाम भी बीच में आया

दिल्ली में वीरवार को बैठक में प्रदेश नेतृत्व के समक्ष सुधीर के चुनाव लड़ने से मना करने के बाद हाईकमान ने आननफानन में कांगड़ा-चंबा संसदीय युकां के कार्यकारी अध्यक्ष विजयइंद्र कर्ण को दिल्ली बुला दिया। वह शाहपुर विस क्षेत्र के रहने वाले हैं। उन्होंने टिकट के लिए आवेदन किया था।

सूत्रों के अनुसार शुक्रवार देर शाम तक विजयइंद्र कर्ण के नाम पर कांग्रेस हाईकमान ने मुहर लगा दी, लेकिन अचानक जीएस बाली के बेटे रघुवीर सिंह बाली का नाम बीच में आने से प्रत्याशी की घोषणा शनिवार के लिए टाल दी गई। ऐन वक्त पर एमसी के मेयर देवेंद्र जग्गी का पत्ता भी कट गया।  

सुधीर के चुनाव न लड़ने के ये हो सकते हैं कारण
माना जा रहा है कि धर्मशाला में पुराने कांग्रेसियों के विरोध और अचानक टिकट के तलबगारों की संख्या ज्यादा बढ़ने को सुधीर उपचुनाव में मुफीद नहीं मान रहे थे। राजनीतिक विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि सुधीर ने ऐन मौके पर उपचुनाव लड़ने से मना कर प्रदेश नेतृत्व को संभलने का मौका नहीं दिया। इससे, 2022 में बेहतरीन वापसी हो सके या पैराशूट से आकर भाजपा प्रत्याशी के रूप में एंट्री कर उपचुनाव जीता जा सके।
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