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शहर में आज दोपहर 12 से 3 बजे तक कम चलेंगी बसें

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सरकारी और निजी बसों के चालक-परिचालक मनाएंगे होली
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अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। होली पर आज (18 मार्च) दिन के समय कम बसें चलेंगी। एचआरटीसी और प्राइवेट बसों का स्टाफ दिन के समय होली मनाएगा। हालांकि सुबह और शाम के समय बसों की आवाजाही सामान्य रहेगी।
दोपहर 12 से तीन बजे तक रूटों पर सामान्य के मुकाबले कम संख्या में बसें चलेंगी। एचआरटीसी कर्मचारी दिन के समय होली खेलेंगे। राजधानी शिमला में सुबह पांच से 12 बजे तक बसों की आवाजाही सामान्य रहेगी। सभी बसें अपने तय रूटों पर रवाना की जाएंगी। दोपहर बाद तीन से रात दस बजे तक बसों की आवाजाही सामान्य रहेगी। दिन के समय तीन घंटों के लिए रूटों पर कम संख्या बसें चलेंगी। हालांकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न झेलनी पड़े इसके लिए दिन के समय भी रूटों पर नियमित अंतराल में बसें रवाना की जाएंगी। प्राइवेट बस ऑपरेटर यूनियन के महासचिव सुनील चौहान ने बताया कि दिन के समय चालक-परिचालक होली मनाएंगे लेकिन सुबह और शाम के समय लोगों की सुविधा के लिए रूटों पर बसें चलाई जाएंगी।
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हुड़दंगियों की पुलिस को दें सूचना
होली पर मौज मस्ती करें लेकिन दूसरों को परेशान किए बिना। वरना त्योहार के दिन हवालात की सैर भी करनी पड़ सकती है। होली पर हुड़दंगियों से निपटने के लिए पुलिस ने पुख्ता बंदोबस्त किए हैं। नशे में ड्राइविंग करने वालों को पकड़ने के लिए पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं। शहरभर में पुलिस टीमें एल्कोसेंसर के साथ तैनात रहेंगी और नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। होली के नाम पर लोगों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ संख्ती बरती जाएगी। होली के नाम पर यदि कोई हुड़दंग मचा रहा हो तो तुरंत पुलिस को 100 नंबर या नजदीकी थाने में फोन कर सूचना दी जा सकती है। हुड़दंग मचाने वालों पर कार्रवाई के लिए सभी थानों को विशेष टीमें गठित कर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं।
होली मुबारक, पर रंगों से जरा बचके
शिमला। होली मुबारक, बाहर बरसते रंगों में रंगने जा रहे हैं तो जरा संभलकर। होली का त्योहार आपके लिए परेशानी न बन जाए। इसके लिए थोड़ी एहतियात के साथ होली खेलना जरूरी है। केमिकल रंगों से त्वचा और आंखों पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। केमिकल से बने रंगों से परहेज करें। हर्बल रंगों का कोई विकल्प नहीं है। फिर भी होली के हुड़दंगियों से सावधान रहने के लिए बाहर निकलने से पहले अपनी त्वचा पर तेल या फिर वैसलीन का लेप जरूर लगाएं जिससे केमिकल रंगों का असर न के बराबर होगा।
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केमिकल रंगों का न करें इस्तेमाल
केमिकल रंगों में अभ्रक और शीशा होता है। कॉपर सल्फाइड और लेड ऑक्साइड जैसे रसायन त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंचाते हैं। नेत्ररोग विशेषज्ञों के अनुसार शीशा कॉर्निया को क्षति पहुंचाता है। कोर्नियल एंब्रेशन में तुरंत इलाज की जरूरत होती है। यदि आंखों में रंग चला जाए तो तुरंत ठंडे पानी से धोएं। राहत न मिले तो डॉक्टर से परामर्श लें।
यह बीमारी होने का रहता है खतरा
ग्रीन में कॉपर सल्फेल्ट से आंखों में संक्रमण, अंधता
परपल में क्रोमियम आयोडाइड की वजह से अस्थमा, स्किन एलर्जी
सिल्वर में एल्युमीनियम क्रोमाइड से अस्थमा
ब्लैक में लेड ऑक्साइड के कारण लर्निंग डिसएबिलिटी
रेड में मरक्युरी सल्फाइड मिलाने से कैंसर, पैरालिसिस और मेंटल डिसऑर्डर
शाइनिंग कलर्स में गोेल्डन लेड मिलाने के कारण स्किन प्राब्लम संभव है।
आपातकाल में यहां करें फोन
पुलिस 100
एंबुलेंस 108
अग्निशमन 101
बच्चों पर रखें नजर
इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे रंग को न तो मुंह में डालें और न ही आंखों में
बच्चों को बताएं कि दूसरों पर उनकी मर्जी के बिना पिचकारी या रंग न डालें
बच्चों को गीले फर्श पर भागने से रोंके। चप्पल की जगह उन्हें जूते पहनाएं
बच्चे को मुंहासे या एलर्जी की दिक्कत है तो उसे रंग से ज्यादा न खेलने दें
बच्चों को प्राकृतिक रंग से होली खेलने की सीख दें और साथ ही पानी बचाने के बारे में भी बताएं
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