हिमाचल में परिवहन विभाग ने 34 सौ के करीब बस मालिक को रूट परमिट आवंटित किए हैं। इनमें कई लोग ऐसे हैं, जिन्होंने रूट परमिट आगे बेच दिए। वर्षों पहले जो रूट किसी व्यक्ति को दिया गया था, आज वही रूट परमिट आगे से आगे बेच दिया गया।
बताया जा रहा है कि निजी आपरेटर 5 से 6 साल तक रूटों पर बस दौड़ाते हैं और जब बस को रिपेयर की जरूरत होती है तो मालिक बस के साथ-साथ रूट परमिट भी बेच देते हैं, जिससे वे लाखों की कमाई करते हैं।
अधिकारियों का मानना है कि इससे निजी बस ऑपरेटरों को तो खूब फायदा हो रहा है, लेकिन परिवहन विभाग को इससे कोई आमदनी नहीं हो रही है।
आवंटित रूट आगे किसी और को बेचने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। एसटीए की बैठक में ऐसे कई मामले आए थे, जिन्हें स्वीकृति नहीं दी गई।
कैप्टन जेएम पठानिया, निदेशक, परिवहन विभाग