हिमाचल प्रदेश की रसीली चेरी ने मंडियों में दस्तक दे दी है। शिमला में चेरी सीजन की बंपर शुरुआत हुई है। बुधवार को ढली मंडी में ननखड़ी की चेरी प्रतिकिलो 400 रुपये के रिकॉर्ड रेट पर बिकी। इस साल प्रदेश में गुठलीदार फलों का सीजन करीब दो हफ्ते देरी से शुरू हुआ है। सीजन की शुरुआत में ही बागवानों को 400 रुपये प्रति किलो तक रेट मिल रहे हैं, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुने हैं। पिछले साल 13 अप्रैल को चेरी बाजार में पहुंची थी और कीमत अधिकतम 200 रुपये प्रतिकिलो तक थी। इस साल 26 अप्रैल को चेरी मंडी में पहुंची है और शुरुआत में ही 400 रुपये प्रतिकिलो का रेट मिला है। प्रदेश में चेरी की सबसे अधिक पैदावार शिमला जिले के ननखड़ी, कोटगढ़ और नारकंडा क्षेत्रों में होती है।
ढली मंडी के कुशांग ट्रेडर्स के संचालक यशवंत शर्मा ने बताया कि ननखड़ी की बढि़या गुणवत्ता वाली चेरी उनके पास आई थी, जिसे स्थानीय खरीदारों ने ही खरीदा। आने वाले दिनों में चेरी की आमद बढ़ने पर शिमला से चेरी बंगलूरू, महाराष्ट्र और गुजरात तक भेजी जाएगी। कृषि उपज विपणन समिति शिमला एवं किन्नौर के सचिव देवराज कश्यप ने बताया कि गुठलीदार फलों के सीजन के लिए मंडी समिति ने सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। खड़ेला ननखड़ी के बागवान राज मेहता ने बताया कि उनकी चेरी 310 से 400 रुपये प्रति बॉक्स के रेट पर बिकी है। मेहता ने बताया कि परंपरागत रेड चेरी के अलावा उन्होंने अपने बगीचे में स्टेला, मरचेंट, नीरो डीरो सहित अन्य किस्में लगा रखी हैं