सोलन के कुमारहट्टी में चार मंजिला इमारत गिरने से सबक लेकर राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण को लेकर नई योजना बनाई है। गांवों में अब रिटायर इंजीनियरों की मदद लेकर निर्माण कराया जाएगा।
इन इंजीनियरों के साथ मिस्त्रियों को निर्माण और आपदा संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि भवन भूकंपरोधी बन सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (टीसीपी) के नियम लागू नहीं होते लिहाजा लोग मनमर्जी से निर्माण करते हैं।
इससे भवनों के गिरने की आशंका रहती है जिसके लिए सरकार ने अब इसका तोड़ निकाला है। मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने कहा कि गांव के रिटायर इंजीनियरों और मिस्त्री को भवन बनाने की जानकारी दी जाएगी। जबरन किसी पर भी नियम थोपे नहीं जा सकते हैं।
अगर लोग जानकारी लेना चाहेंगे तो उन्हें जानकारी दी जाएगी। प्रदेश सरकार का मानना है कि हिमाचल में 35 प्लानिंग एरिया हैं, जहां टीसीपी नियमों के तहत भवनों का निर्माण होता है। भवन बनाने के लिए लोगों को पहले टीसीपी से नक्शा पास कराने को आवेदन करना होता है।
नक्शे के लिए आईपीएच विभाग और बिजली बोर्ड से एनओसी लेना होता है। उसके बाद स्ट्रक्चर डिजाइन और इंजीनियरों से स्ट्रक्चर स्टेबिलिटी प्रमाण लिया जाता है जिसके बाद नक्शा पास किया जाता है।
इंजीनियरों के हिसाब से भवनों का निर्माण करना होता है, अगर ऐसा नहीं किया गया तो भवन मालिकों को बिजली-पानी के कनेक्शन नहीं दिए जाते हैं। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ये नियम लागू नहीं होते हैं।
लोग अपनी मर्जी से भवनों का निर्माण करते हैं। मर्जी से पिलर और स्लैब डाले जाते हैं। मिस्त्री के कहने पर पिलर, बीम और स्लैब में सरिया डाला जाता है। ऐसे में भवनों के गिरने की आशंका रहती है।