लिफ्ट के पास बनना था केबल ब्रिज, सरकार ने बंद करवा दिया काम, अब ठेकेदार ने मांगा अपना खर्चा
बिना काम के कैसे करें भुगतान, बिल देखकर अधिकारी हैैरान अशोक चौहान
शिमला। राजधानी में लिफ्ट के पास लोगों की सुविधा के लिए बनने वाला केबल ओवरब्रिज धरातल पर तो नहीं उतरा लेकिन इसका काम जिस ठेकेदार ने लिया था उसने 2.80 करोड़ रुपये का बिल रोपवे कार्पोरेशन को थमा दिया है।
बिना काम के इतना भारी भरकम बिल देखकर कारपोरेशन अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। यह पैसा कौन देगा, इस पर कारपोरेशन से लेकर सचिवालय तक माथापच्ची चल रही है। कारपोरेशन ने यह बिल अब स्मार्ट सिटी प्रबंधन को भेज दिया है। अधिकारी जानते हैं कि ठेकेदार को यह पैसा देना ही पड़ेगा। यदि पैसा नहीं दिया तो मामला अदालत तक जा सकता है। स्मार्ट सिटी मिशन के तहत लिफ्ट के पास करीब छह करोड़ रुपये से ओवरब्रिज का निर्माण होना था। रोपवे कारपोरेशन को इस ब्रिज के निर्माण का जिम्मा दिया था। कारपोरेशन ने इसका डिजाइन तैयार करवाकर काम ठेकेदार को सौंप दिया। इस ब्रिज के बनने से लोगों को सड़क पार करने की सुविधा मिलनी थी।
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पिल्लर खड़े किए, रैंप भी किया तैयार, फिर सब बेकार
ठेकेदार ने इस साल की शुरुआत में ही डिजाइन के अनुसार मौके पर निर्माण कार्य शुरू किया था। इसके लिए सड़क पर लोहे के तीन बड़े पिल्लर लगाए गए। इसके उपर लगने वाला रैंप भी लगभग तैयार करवा दिया था लेकिन इसी बीच सरकार की आपत्ति पर इसका काम रोक दिया गया। आपत्ति इसलिए थी क्योंकि इसका एक पिल्लर सड़क पर आ रहा था जिससे यातायात बाधित हो सकता था। आपत्ति के बाद इसका काम बंद कर हो गया और तीनों पिल्लर भी सड़क से उखाड़ दिए। ठेकेदार का तर्क है कि कई हफ्ते तक न सिर्फ मौके पर काम हुआ बल्कि तैयार किया लोहे का भारी भरकम स्ट्रक्चर भी बेकार हो गया। ऐसे में इसका खर्च दिया जाए।
प्रबंध निदेशक के लौटने का इंतजार : एजीएम
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के प्रबंध निदेशक गोपाल चंद इन दिनों मध्यप्रदेश में चुनावी ड्यूटी में हैं। ऐसे में बिल देने पर अभी फैसला नहीं हुआ है। एजीएम बह्मप्रकाश ने कहा कि केबल ओवरब्रिज को लेकर रोपवे कारपोरेशन से जो बिल आया है, उस पर प्रबंध निदेशक के लौटने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा।