क्रोसिये से बुनी दुल्हन की कीमत 5 हजार
4100 रुपये में बिक रही है लाहौल की गुड़िया संवाद न्यूज एजेंसी शिमला। राजधानी के रिज मैदान पर चल रहे कला एवं शिल्प मेले में कॉटन के धागों से तैयार की गई हमीरपुरी दुल्हन 5 हजार और लाहौली गुड़िया 4100 रुपयेे में बिक रही है।
रंग बिरंगे धागों को एक गुड़िया का रूप देकर कलाकारों ने जहां अपनी प्रतिभा दिखाई है वहीं इसकेे जरिये हिमाचल की संस्कृति को भी दर्शाया है। फाइवर और कॉटन के धागों के मिश्रण सेे तैयार गुड़िया में हिमाचली पहनावे की झलक दिखाई है। इन्हें महिलाओं ने क्रोसिये से बनाकर तैयार किया है। इसके अलावा शिमला और हमरीपुरी दुल्हन के पहनावे में तैयार गुड़िया भी लोगों को लुभा रही हैं।
विज्ञापन
लाहौली गुड़िया में लाहौल की संस्कृति को दिखाया है। चंबा की संस्कृति को दर्शाते गद्दी और गद्दण का जोड़ा भी काफी आकर्षक है। इसकी कीमत तीन हजार रुपये रखी है। इन उत्पादों को चैप फाउंडेशन के माध्यम से कुल्लू में बनाकर तैयार किया जा रहा है। इसके माध्यम से जिले की करीब 70 से 80 महिलाओं को रोजगार मिला है। चैप फाउंडेशन की सदस्य अर्पण अग्रवाल ने बताया कि चैप फाउंडेशन बेरोजगारी के समाधान खोजने और जिम्मेदार पर्यटन को लागू करने में योगदान दे रहा है।
क्रोसिये से किया गया हैै तैैयार मेले में किन्नौरी गुड़िया 4,000, डाइनिंग टेबल सेट 3,000, पैन स्टैंड 850, हैंड बैग 350, मफलर टोपी का सेट 1,800 से 3,500 रुपये में बिक रहा है। कारीगर तृप्ता नेगी ने बताया कि अभी उन्होंने पांच जिलों के सांस्कृतिक परिधानों में गुड़िया बनाकर तैयाार की हैं। जल्द ही 12 जिलों की वेशभूषा को दर्शाती गुड़िया तैयार की जाएंगी। इन्हें क्रोसिये के साथ कॉटन के धागे से बनाकर तैयार किया है।