पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह
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विकासात्मक कार्यों के लिए पंचायतों को राशि जारी होने से पहले जनप्रतिनिधियों को संदेश भेजने की व्यवस्था की जाए, जिससे पंचायत प्रतिनिधियों को भी पता चले कि कब सरकार ने धनराशि दी है। इसके अलावा प्रतिनिधियों ने गांवों के विकास कार्य पूरे नहीं होने की स्थिति में राशि लौटाने की व्यवस्था पोर्टल में करने का सुझाव दिया है। कहा है कि पंचायतों को धनराशि जारी करने के लिए किस्तें बांधी जाएं।शुक्रवार को शिमला के एक निजी होटल में ई- ग्राम स्वराज पोर्टल में खामियों को लेकर मंथन किया गया।
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने एक दिवसीय कार्यशाला में कहा कि इस दौरान आए अहम सुझावों को ध्यान में रखकर भविष्य में ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के वर्जन-दो में सुधार कर खामियों को दूर किया जाएगा। कार्यशाला में हिमाचल प्रदेश सहित देश के आठ राज्यों पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक और ओडिशा के प्रतिनिधियों ने खामियां सामने लाईं। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास में तेजी लाने के लिए सरकार पंचायतों का हिसाब-किताब, खाते, लेखा-जोखा और बजट के लिए ई -ग्राम स्वराज पोर्टल का इस्तेमाल कर रही है। इससे राज्य में ग्रामीण विकास के कामों में पारदर्शिता और तेजी आई है।
गांवों के विकास कार्यों की निगरानी हर रोज ऑनलाइन कर रहे हैं। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि काम की रिपोर्ट तैयार कर पोर्टल में डालने की व्यवस्था हो। अन्य रिपोर्ट भी पंचायत स्तर पर तैयार करने का प्रावधान हो। रिपोर्ट चरणबद्ध तरीके तैयार होनी चाहिए। वर्तमान में ई स्वराज पोर्टल से पंचायतों जीओ टेगिंग, कैश बुक, पंचायतों के पास आई धनराशि और खर्चे का ब्योरा, पंचायतों की योजनाएं आदि पोर्टल पर उपलब्ध रहती हैं। कार्यशाला में हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनिल मल्लिक, राज्य के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज सचिव पी. मंडल. विभाग के निदेश ऋग्वेद ठाकुर, अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।