दरअसल पानी का रिसाव शुक्रवार रात करीब 8:45 बजे अचानक 10 मिनट के लिए बढ़ गया। इससे मुल्थान गांव के ठीक ऊपर की तरफ से पानी के साथ बड़ी मात्रा में पत्थर, पेड़ और मलबा बाजार में पहुंच गया। भनक लगते ही पुलिस चौकी मुल्थान में मौजूद 11 पुलिस कर्मियों और लोगों ने भागकर जान बचाई। पहले से मलबे की चपेट में आईं दुकानों, घरों में और मलबा घुस गया। दुकानों के आधे शटर मलबे से ढक गए हैं। इस मलबे को अपने स्तर पर हटा पाने में स्थानीय लोग असमर्थ हैं। पहाड़ी से नीचे की तरफ भारी मात्रा में आए पानी ने खाई बना दी। इसी के साथ करीब 45 कनाल भूमि पर मलबा कई फुट तक भरा पड़ा है। मुल्थान बाजार से ऊपर की तरफ जहां से रिसाव हुआ है, वहां भी स्थिति गंभीर बनी हुई है।
बाढ़ का पता चलते ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे
प्रभावितों में राम चंद, डाॅक्टर पंकज, डोला, ज्ञान चंद, नागनू, नानक, राजू, डागू राम, हेम राम ने बताया कि दोबारा भारी बाढ़ आने का पता चलते ही आनन-फानन सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे। शनिवार सुबह बाजार और आसपास मंजर देखा तो दंग रह गए। चारों तरफ मलबा ही दिखा। उधर, मुल्थान पुलिस चौकी प्रभारी राजेंद्र कुमार ने कहा कि रात को 11 पुलिस लोगों ने भागकर जान बचाई। अन्यथा वह भी मलबे की चपेट में आ जाते।
44 प्रभावितों को दी 2.04 लाख की फौरी राहत
एसडीएम बैजनाथ देवी चंद ने बताया कि प्रशासन मौके जायजा ले रहा है। मलबे की चपेट में आए कुल 48 प्रभावितों में से 44 को 2.04 लाख रुपये फौरी राहत राशि बांटी गई है।
72 घंटे में होगा नुकसान का आकलन, सात दिन में भुगतान
मुल्थान बाजार में बाढ़ व मलबे से प्रभावित परिवारों के आक्रोश के बाद एसडीएम बैजनाथ देवी सिंह की अध्यक्षता में प्रभावितों व कंपनी प्रबंधन की बैठक हुई। इसमें इस पूरे मामले को लेकर चर्चा हुई। कंपनी प्रबंधन ने हामी भरी है कि 72 घंटे के अंदर नुकसान का पूरा आकलन किया जाएगा और एक सप्ताह में कंपनी मुआवजा देगी। बैठक में कंपनी प्रबंधन के उच्चाधिकारी शामिल रहे। वहीं, शनिवार दोपहर को प्रशासन की टीम ने लंबाडग प्रोजेक्ट की क्षतिग्रस्त टनल और हालात का जायजा लिया।