उधर, अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी (एडीएम) डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बीते सोमवार को गोबिंदसागर झील में हुए हादसे की जांच शुरू कर दी है। बुधवार को डॉ. अमित ने अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर घटनास्थल का दौरा किया। जांच रिपोर्ट उपायुक्त को दो या तीन दिन में सौंपी जा सकती है। इसके बाद सभी हितधारकों के साथ बैठक की और फीडबैक लिया। स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों से भी इस तरह के हादसों को रोकने और एहतियातन कदम उठाने को लेकर जानकारी ली। सभी हितधारकों के साथ बैठक कर विस्तार से जानकारी ली गई। एडीएम ने शोक में डूबे में मृतकों के साथियों के बयान नहीं लिए हैं। पुलिस को दिए बयान को ही जांच में शामिल किया गया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस जांच को गुप्त रखा जा रहा है। जांच में क्या किया जा रहा है, इसे सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि एडीएम ने स्थानीय मंदिर कमेटी को दो सिक्योरिटी गार्ड तैनात करने की सिफारिश की है। लाउडस्पीकर के जरिये झील किनारे आने वाले लोगों को चेतावनी देने को कहा गया है। यदि चेतावनी के बावजूद पर्यटक नहीं हटते हैं तो सिक्योरिटी गार्ड उन्हें हटाएंगे। वाहनों को झील किनारे ले जाने पर रोक लगाने पर मंथन चल रहा है। सड़क के पास ही पार्किंग की योजना बनाई जा रही है। उधर, एडीएम डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि जांच की जा रही है। सभी तथ्यों और हितधारकों से बातचीत की जा रही है। जांच रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी जाएगी। गौरतलब है कि बीते सोमवार को पंजाब के बनूड़ से प्रदेश के धार्मिक स्थलों में घूमने आए 11 में से 7 युवा कोलका स्थित गोबिंदसागर झील किनारे डूब गए थे। इसके बाद उपायुक्त ने एडीएम को जांच का जिम्मा सौंपा है।