हिमाचल सरकार ने बेशक अपने कर्मचारियों को एक साल का सेवा विस्तार दे दिया हो, लेकिन बोर्ड-निगमों के लिए स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है। सार्वजनिक उपक्रमों के दफ्तरों से वीरवार को वित्त विभाग में कई फोन पूछताछ के लिए आए। राज्य में इस समय 22 सरकारी बोर्ड-निगम हैं।
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इनमें करीब 42 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। ये इस स्कीम के दायरे में आएंगे या नहीं, इस पर दिनभर असमंजस बना रहा। क्योंकि वित्त विभाग की अधिसूचना में सार्वजनिक उपक्रमों का कोई हवाला नहीं है।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में वित्त विभाग के प्रधान सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी ने बताया कि बोर्ड-निगमों को अपने स्तर पर ये फैसला लेना है। ये मसला निदेशक मंडल के सामने रखना होगा। जिन उपक्रमों में सरकारी क्षेत्र के फंडामेंटल रूल्स लागू हैं, उनमें ये संशोधन लागू हो जाएगा।
जहां ये रूल्स लागू नहीं है, वहां पहले इन्हें लागू करना होगा। राज्य सरकार ने फंडामेंटल रूल्स 56(2) में संशोधन कर 58 साल के सामान्य सेवाकाल के बाद एक साल के सेवा विस्तार का प्रावधान किया है।
इधर, इस स्कीम के बाद बिजली बोर्ड ने वीरवार को ही इस बारे मे मेमोरेंडम तैयार कर लिया था। इसे अब निदेशकों की मंजूरी के लिए रखा जाएगा। इसके बाद ही इस व्यवस्था को लागू किया जा सकेगा।
एचआरटीसी में भी ऐसी ही तैयारी चल रही है। अन्य उपक्रमों को भी ये ही रास्ता अपनाना होगा। लेकिन इस प्रक्रिया के कारण 30-31 मई को रिटायर होने वाले कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
उपसचिव कृषि ने नहीं लिया सेवा विस्तार
लागू होने के बावजूद ऐसे कर्मचारी एवं अधिकारी हैं, जिन्हें ये स्कीम पसंद नहीं आई है। 30 मई को सचिवालय से रिटायर होने वाले उप सचिव कृषि शेर सिंह शर्मा ने एक साल का सेवा विस्तार लेने के बजाय रिटायर होना ही बेहतर समझा। उन्हाेंने कहा कि यदि रिटायरमेंट की उम्र बढ़ती तो वह विचार करते। स्कीम वर्तमान मेें जिस प्रारूप में लागू की गई है, उन्हें वह अच्छी नहीं लगी। इससे तो अच्छा है कि नए लोगों को मौका मिले।
एक साल देनदारी टालने को उठाया कदम
हिमाचल सरकार ने एक साल का सेवा विस्तार देकर अपनी देनदारियों को एक साल के लिए टाल लिया है। हालांकि, इससे आर्थिक संकट का कोई स्थायी हल नहीं निकला है। राज्य सरकार कर्मचारियों के सालाना वेतन और पेंशन पर 11143 करोड़ खर्च कर रही है।
हर साल रिटायर हो रहे करीब 4000 कर्मचारियों पर 450 करोड़ का भुगतान सेवानिवृत्ति लाभों के रूप में करना पड़ रहा है। इस देनदारी को सरकार ने एक साल टाला है।