हिमाचल के चंबा जिले की पांगी घाटी में नीलम रत्न के प्रमाण मिले हैं। यही नहीं देवभूमि में यूरेनियम, चांदी और क्रिस्टल स्टोन भी पाया जाता है। हालांकि, इसकी प्रदेश सरकार और भू वैज्ञानिकों को भी जानकारी है, लेकिन इसकी सही मात्रा के आकलन और इसके दोहन के अभी कोई प्रयास नहीं हुए हैं।
हिमाचल के पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर की पधर वैली में नीलम रत्न पाया जाता है। चंबा जिले की पांगी घाटी भी पधर वैली से ही सटी है। राज्य उद्योग विभाग की खनन विंग को इसी के कई क्षेत्रों में नीलम होने के कुछ अपुष्ट प्रमाण मिले हैं। नीलम दुनिया के महंगे रत्नों में से एक है। मगर इसकी सही मात्रा के आकलन और इसके दोहन के अभी कोई प्रयास नहीं हुए हैं। इसके सही खनन-सर्वेक्षण के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आएगी।
नीलम का महत्व- भारतीय समाज में नीलम ज्योतिषीय उपचार के लिए खूब बिकता है। यह शनि ग्रह का पसंदीदा नग माना जाता है। ज्योतिष ग्रंथों के मुताबिक इसे शनि ग्रह को खुश करने के लिए पहना जाता है।
अन्य रत्न भी हैं हिमाचल में
हमीरपुर के खिया, कंगनी, बड़सर और शिमला जिले के काशापाट में यूरेनियम के प्रमाण मिल चुके हैं। शिमला के चिड़गांव और किन्नौर के अंबा क्षेत्र में जगह-जगह चांदी के कण मिले हैं। कुल्लू के चौग, उचीच और खेनौर खड्डों में भी चांदी के कण पाए गए हैं। चंबा में मनछप नाला, किन्नौर में लिप्पा, सगनम, रोपा घाटी, कुल्लू के मौहल, हुरला और सैंज घाटी के बीच के क्षेत्रों की चट्टानों में कुछ मात्रा में तांबा मिला है।
कुल्लू में मणिकर्ण और सैंज घाटी की चट्टानों में क्रिस्टल स्टोन है। राज्य भू विज्ञानी रजनीश कुमार ने बताया कि पांगी घाटी में नीलम की वास्तविक मात्रा बता पाना अभी मुश्किल है। खनन, सर्वेक्षण किए जाने के बाद ही कुछ कह सकते हैं। यूरेनियम, चांदी, तांबा और क्रिस्टल स्टोन की मात्रा इतनी अधिक नहीं है कि इनका दोहन कर यह राज्य के लिए लाभप्रद हो सके। लागत अधिक बैठेगी।