अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर (एम्स) में ब्लड बैंक शुरू हो गया है। खास बात यह है कि यहां पर ब्लड कंपोनेंट्स तैयार करने के लिए अत्याधुनिक मशीन लगाई गई है। इसमें मात्र 20 मिनट में कंपोनेंट्स तैयार होंगे। इससे पहले एम्स में इसकी सुविधा नहीं थी। इस कारण मरीजों को यहां से रेफर कर दिया जाता था। अब ब्लड कंपोनेंट्स के अभाव में रेफर करने की जरूरत नहीं होगी।
एम्स में ब्लड स्टोर करने की सुविधा थी। यहां पर 700 यूनिट तक का ब्लड स्टोर किया जा सकता है। लेकिन ब्लड कंपोनेंट्स तैयार करने के लिए मशीन नहीं थी। अब इस मशीन को स्थापित कर दिया है। इसमें फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा, प्लेटलेट्स, ब्लड सेल के अलावा अन्य कंपोनेंट्स 20 मिनट में तैयार होंगे। इसके साथ ही एम्स का ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग काम करना शुरू कर देगा।
बताते चलें कि एम्स में सभी विभाग की ओपीडी काम कर रही है। गायनी और ऑर्थो विभाग शुरू होने के बाद से ब्लड बैंक, कंपोनेंट्स की जरूरत ज्यादा महसूस की जा रही थी। यह सुविधा न होने से न केवल मरीजों लेकिन विशेषज्ञों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कुछ माह पहले पर्याप्त रक्त, कंपोनेंट्स उपलब्ध नहीं होने से एक गर्भवती महिला को शिमला रेफर करना पड़ा था।
उसने रास्ते में ही एंबुलेंस में बच्चे को जन्म दे दिया था। इस घटना के बाद से एम्स में मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाने लगे थे। इसके बाद से एम्स प्रबंधन ने ब्लड बैंक और कंपोनेंट्स को शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाई। अब एम्स प्रबंधन रक्तदान शिविर का भी लगातार आयोजन कराएगा ताकि खून की कमी न हो।
एम्स के विभागों में ये मिल रहीं सुविधाएं
एम्स में दंत चिकित्सा, नेफ्रोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, फिजियोलॉजी, कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन, ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, ईएनटी, एनाटॉमी, जनरल मेडिसिन, न्यूरोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन, सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, शिशु रोग, पीडियाट्रिक सर्जरी, हड्डी रोग, सीटीवीएस, नेत्र रोग, पैथोलॉजी, डर्माटोलॉजी, रेडियोथेरेपी, एनेस्थीसिया, रेडियोडायगनोसिस, प्लास्टिक सर्जरी, एंडोक्रिनोलॉजी, फार्माकोलोजी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, मनोचिकित्सा, सामान्य सर्जरी की ओपीडी चल रही है।