पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि चार वर्षों के कांग्रेस सरकार के कुशासन, कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार के चलते प्रदेश की वित्तीय स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। केंद्र सरकार की अपार आर्थिक सहायता के बावजूद प्रदेश को कर्ज के मकड़जाल में उलझाया जा रहा है। पहले से ही लगभग 36000 करोड़ रुपये के कर्जे के बोझ तले दबे हिमाचल की स्थिति 1000 करोड़ रुपये के नये कर्जे से और भी खराब हो जाएगी।
वह भी उन परिस्थितियों में जब महीने पूर्व ही प्रदेश सरकार लगभग 700 करोड़ रुपये कर्ज ले चुकी है। चुनावों के मद्देनजर प्रदेश सरकार ने पहले तो बिना बजट का प्रावधान किए झूठी घोषणाओं का अंबार लगा दिया, अब सरकार चलाने के लिए भी कर्ज का सहारा लिया जा रहा है। प्रदेश और जन विकास का बजट केवल ऋण चुकाने में ही खर्च हो रहा है, जिससे जन विकास की योजनाओं के लिए धन ही उपलब्ध नहीं है।
सरकार के इस आर्थिक कुप्रबंधन से प्रदेश का वित्तीय ढांचा अस्त-व्यस्त हो गया है। चार वर्षों के शासनकाल में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के आर्थिक संसाधन बढ़ाने का कोई प्रयास नहीं किया, जिसके चलते प्रदेश आत्मनिर्भर बनने के बजाए केंद्र सरकार पर निर्भर होकर रह गया है। कांग्रेस शासनकाल के चार वर्षों की अवधि में प्रदेश के स्वयं के आर्थिक संसाधनों से राजस्व में मात्र 30 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई है।
जबकि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के दौरान यह वृद्धि लगभग 5000 करोड़ रुपये से अधिक की थी। धूमल ने कहा कि प्रदेश सरकार लिए जा रहे इन कर्जों के लिए भले ही लाख बहाने बनाए लेकिन सच्चाई यह है हम अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा हिमाचल दे रहे हैं जो कर्जों के बोझ से दबा हुआ होगा और विकास के लिए मिल रहे धन को विकास कार्यों पर लगाने के बजाए ऋण चुकाने में ही लगाया जाएगा।