हिमाचल को कांग्रेस सरकार से विरासत में दिवालियापन मिला है। पूर्व सरकार विकास कार्यों को छोड़ अदालत के चक्कर लगाती रही। हिमाचल के पास सरपल्स साधन नहीं हैं। यही कारण है कि 27 हजार करोड़ का उधार है।
प्रदेश में आय से अधिक तो कर्मचारियों की तनख्वाह बनती है। सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को पेंशन तक देने के लिए पैसा नहीं है। यह बात सांसद शांता कुमार ने कही।
वे पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। कहा कि सत्ता में पक्ष और विपक्ष की महत्ता काफी रहती है। बावजूद इसके हिमाचल में सरकार बनने के कुछ ही समय के बाद विपक्ष एकदम से आलोचना करने में जुट गया।
कहा कि उनके हिसाब से विपक्ष में परिवक्वता नहीं है। विपक्ष को छह माह तक इंतजार तो करना चाहिए। विपक्ष को बैठना ही नहीं आ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के सरकार के कामकाज पर टिप्पणी के लिए कुछ समय का इंतजार करने के उस बयान पर शांता बोले - वीरभद्र सुलझे हुए राजनीतिज्ञ हैं, लेकिन उनकी बात कांग्रेस में मानता कौन है।
कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में पर्यटन व्यवसाय को बढ़ाने की बात कही गई थी, लेकिन वे इसे कर नहीं पाए। अब मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के नेतृत्व में सरकार जनहित में कार्य कर रही है।
प्रदेश में पर्यटन को विकसित कर और सीमेंट प्लांट लगाकर बेरोजगार युवाओं को रोजगार दिया जाएगा। विपक्ष को व्यर्थ की आलोचनाएं छोड़ कर हिमाचल के विकास के लिए सरकार के साथ मिलकर प्रयत्न करना चाहिए।
इस दौरान जिलाध्यक्ष डीएस ठाकुर, विधायक पवन नैयर, भरमौर विधायक जियालाल कपूर, भटियात विधायक विक्रम जरयाल और भाजपा महामंत्री जय सिंह सहित भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।