माचल में एनएच जमीन अधिग्रहण मामले में किसानों को उचित मुआवजा दिए जाने पर जोर देते हुए विपक्ष ने सदन में खूब हंगामा किया। विपक्ष प्रभावितों को फेक्टर-2 यानी चार गुना मुआवजा राशि देने की मांग पर अड़ा रहा। लेकिन सरकार ने सेंट्रल लैंड एक्यूजेशन एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि हिमाचल सरकार अभी तक सड़क के लिए जमीन अधिग्रहण मामले में फेक्टर-1 के तहत ही मुआवजा राशि दे रही है।
इस पर भाजपा विधायक सदन में भड़क गए। उन्होंने पहले नारेबाजी की और उसके बाद सदन का बहिष्कार कर दिया। भाजपा विधायक सतपाल सिंह सत्ती ने विधानसभा में मुआवजा राशि को फेक्टर-2 के तहत दिए जाने का मामला उठाया। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और राजस्व मंत्री कौल सिंह ने सदन में स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सरकार इस स्थिति में नहीं है कि फेक्टर-2 के तहत तमाम परियोजनाओं के लिए इतना मुआवजा दे।
अगर भारत सरकार नेशनल हाईवे और फोरलेन में मुआवजा राशि को फेक्टर-2 के तहत मुहैया कराती है तो प्रदेश सरकार को इसे देने में कोई हर्ज नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल में किरतपुर से मनाली और परवाणू से शिमला नेशनल हाईवे का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए मुआवजा राशि केंद्र सरकार तय करती है।
अन्य राज्यों में भी ग्रामीणों को फेक्टर वन के तहत मुआवजा राशि दी जा रही है। पंजाब, हरियाणा, जम्मू, गुजरात में भी फेक्टर वन के तहत लोगों को मुआवजा राशि दी जा रही है। राजस्व मंत्री कौल सिंह ने बताया कि सड़क के विस्तारीकरण को देखते हुए सरकार ने सर्कल रेट को रिवाइज किया है।
नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने फेक्टर -2 के तहत मुआवजा राशि दिए जाने के प्रस्ताव को विधानसभा से पारित कर केंद्र सरकार को भेजने की सिफारिश की। इस पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि केंद्र में भाजपा की सरकार है, ऐसे में विपक्ष के नेता इस
मामले को केंद्र के समक्ष उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह हंगामा दिल्ली जाकर करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार लिखकर दे तो राज्य सरकार फेक्टर-1 के तहत मुआवजा देने को तैयार है।
क्या है फेक्टर
जिस क्षेत्र में जमीन का जो मार्केट रेट होता है, नेशनल हाईवे और फोरलेन में मार्केट रेट पर फेक्टर-1 यानी दो गुना और फेक्टर-2 में यह राशि चार गुना हो जाती है।