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राजनीति: सोनिया और राहुल गांधी से मिले भाजपा विधायक अनिल, बोले- जिस पार्टी में मान-सम्मान, वही प्राथमिकता

Tue, 23 Aug 2022 09:31 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी

सार

 वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की अपनी मजबूरी सोनिया और राहुल गांधी को बताई है। हालांकि, उनकी क्या मजबूरी थी, इसका खुलासा नहीं हो पाया है। 
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भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के मंडी सदर से भाजपा विधायक एवं पूर्व मंत्री अनिल शर्मा ने नई दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि उन्होंने वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने की अपनी मजबूरी सोनिया और राहुल गांधी को बताई है। हालांकि, उनकी क्या मजबूरी थी, इसका खुलासा नहीं हो पाया है। इससे पूर्व अनिल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात की थी।  दिल्ली से लौटकर अनिल शर्मा ने बताया कि कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं से बात कर ली है। जिस पार्टी में उन्हें मान-सम्मान और राजनीतिक सुरक्षा मिलेगी, वही प्राथमिकता होगी। विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों में होने हैं। ऐसे में अब सुखराम परिवार की अगली सियासी चाल क्या होगी, इस पर सबकी निगाहें टिक गई हैं। अनिल शर्मा पिता दिवंगत पंडित सुखराम का नाम और काम भुनाने में डटे हुए हैं। कांग्रेस और भाजपा के बड़े नेताओं से तार जोड़ रहे हैं। पंडित सुखराम के वोट बैंक को देखकर भाजपा चुनावों के नाजुक समय में ऐसा कोई कदम उठाना नहीं चाहती, जिससे उसे नुकसान हो।

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कांग्रेस भी अनिल शर्मा को घर वापसी का मौका देकर मंडी सीट को फिर से कब्जाने की फिराक में हैं। मुख्यमंत्री जयराम के गृह क्षेत्र मंडी में सबसे हॉट सीट मंडी सदर की है। यहां सुखराम परिवार का ही वर्चस्व रहा है। 2017 के चुनावों में कांग्रेस से इस्तीफा देकर अनिल शर्मा भाजपा में शामिल हो गए थे। पिता पंडित सुखराम भी भाजपा को जीत दिलाने चुनावी रण में उतरे और मंडी सीट पर अरसे बाद मंडी सदर में भाजपा को भगवा फहराने का मौका मिला था। सरकार बनने पर भाजपा सरकार में अनिल शर्मा को ऊर्जा मंत्री का पद मिला। लेकिन 2019 के लोकसभा चुनावों में उनके बेटे आश्रय शर्मा को कांग्रेस से टिकट मिला। इस दौरान अनिल शर्मा पार्टी के साथ न होकर कैंपेन से किनारा कर गए और बेटे के समर्थन में दिखे। इस दौरान उन्होंने भाजपा के मंत्री पद को भी छोड़ दिया। तब से अनिल शर्मा भाजपा में होते हुए भी भाजपा के नहीं हैं। सीएम जयराम और अनिल शर्मा के बीच कई बार तकरार हुई है। लेकिन विधानसभा चुनावों के बीच फिर से दोनों एक ही मंच पर भी दिखने लगे हैं। उधर, विधायक अनिल शर्मा ने कहा कि कांग्रेस और भाजपा के शीर्ष नेताओं से बात हुई है। दोनों तरफ अपनी बात उन्होंने रखी है।  

आनंद के इस्तीफे से कौल आहत 
पूर्व मनमोहन सरकार में मंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद आनंद शर्मा के हिमाचल कांग्रेस चुनाव संचालन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफे को लेकर पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कौल सिंह ठाकुर आहत हैं। उन्होंने अपने ही पार्टी पर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल में हो रहे विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रदेश कांग्रेस परामर्श प्रक्रिया में आनंद शर्मा जैसे वरिष्ठ नेता की अनदेखी हुई है। अध्यक्ष होने के बावजूद उन्हें बैठक में नहीं बुलाया गया है। ऐसे में उन्होंने इस्तीफा भले ही दे दिया है लेकिन वह कांग्रेस के एक सच्चे सिपाही हैं और वह कांग्रेस का साथ कभी नहीं छोड़ेंगे। कौल सिंह संचालन समिति के सदस्य भी हैं। अध्यक्ष सोनिया गांधी ने 26 अप्रैल को प्रतिभा सिंह को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के अलावा चार कार्यकारी अध्यक्ष और आठ अन्य कमेटियां गठित की थीं। तब आनंद शर्मा को स्टीयरिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। इसमें वरिष्ठ नेता आशा कुमारी, धनीराम शांडिल, कुलदीप सिंह राठौर, विप्लव ठाकुर, कौल सिंह ठाकुर, राम लाल ठाकुर, चंद्र कुमार, सुरेश चंदेल और हर्षवर्धन चौहान को शामिल किया गया था। आनंद शर्मा से पहले जी-23 गुट के ही एक अन्य नेता गुलाम नबी आजाद भी जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस की चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे चुके हैं। कौल सिंह भी आनंद शर्मा से करीबियों को लेकर काफी चर्चा में रहे हैं।

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