परिणाम घोषित होते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे रणनीतिक सफलता और बेहतर राजनीतिक प्रबंधन का परिणाम बताया। उधर, भाजपा ने हार के कारणों को लेकर मंथन शुरू कर दिया है। करसोग पंचायत समिति के 15 सदस्यीय सदन में भाजपा समर्थित 10 सदस्य, कांग्रेस समर्थित चार सदस्य और एक निर्दलीय सदस्य निर्वाचित हुआ था। ऐसे में दोनों पदों पर भाजपा की जीत लगभग तय मानी जा रही थी, लेकिन मतदान के दौरान बदले समीकरणों ने परिणाम पूरी तरह बदल दिए।
एक-एक वोट के अंतर से मिली कांग्रेस की जीत ने भाजपा समर्थित खेमे में संभावित क्रॉस वोटिंग या अंदरूनी असंतोष की चर्चाओं को भी हवा दे दी है। सूत्रों के अनुसार मतदान से पहले दोनों दलों ने अपने-अपने समर्थित सदस्यों को एकजुट रखने के लिए लगातार प्रयास किए। भाजपा ने टूट रोकने की कोशिश की, लेकिन अंतिम समय में बने राजनीतिक समीकरण उसके पक्ष में नहीं रहे। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सीमित संख्या बल के बावजूद प्रभावी रणनीति के सहारे पंचायत समिति के दोनों प्रमुख पदों पर कब्जा कर लिया।