पूर्व आईएएस और भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम सिंह द्रैक ने कहा कि वीरभद्र सरकार का अवैध कब्जे नियमित करना महज चुनावी स्टंट है। उन्होंने वीरभद्र सिंह सरकार से पूछा है कि क्या वन भूमि पर अवैध कब्जे नियमित करने की नीति लागू करने से पहले केंद्र सरकार की स्वीकृति ली है।
उन्होंने जानना चाहा कि सरकार ने पांच साल की अवधि में अवैध कब्जे नियमित करने की नीति को क्यों लागू नहीं किया। द्रैक ने यहां प्रेस सम्मेलन में कहा कि क्या वीरभद्र सरकार वन भूमि पर अवैध कब्जे नियमित करने के लिए नीति लागू करने की बात कर रही है। वीरभद्र सरकार जोरदार प्रचार कर रही है कि पांच बीघे तक के अवैध कब्जों को नियमित किया जाएगा।
यह प्रचार भी तब किया जा रहा है जब पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने रामपुर दौरे के दौरान घोषणा की थी कि उनकी सरकार सत्ता में आते ही इन अवैध कब्जों को नियमित करेगी। उनका कहना है कि ऐसी नीति लागू करने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। क्षेत्र के लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
वर्तमान स्थिति को देखते हुए लगता नहीं कि चुनाव से पहले अवैध कब्जे नियमित होंगे। सरकार को अवैध कब्जों को चुनाव से पहले नियमित करना चाहिए। द्रैक ने कहा कि वन भूमि पर सबसे ज्यादा अवैध कब्जे जिला कांगड़ा और ऊना में हैं।
इसके बावजूद सिर्फ जिला शिमला, कुल्लू और मंडी में अवैध कब्जे हटाए गए। ऐसा क्यों किया गया। ये अवैध कब्जे भी उन लोगों के हटाए हैं, जो भूमिहीन और गरीब हैं। उनका कहना है कि जिन गरीब और छोटे बागवानों के अवैध बगीचे हटाए गए और मकान तोड़े गए हैं, उनको हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।