मेयर चाहतीं तो हमसे भी सलाह ले सकती थीं, लेकिन वह सुनने को ही राजी नहीं हैं। शिमला की इतनी गंदी सूरत कभी नहीं थी, जितनी अब हो गई है। मौजूदा नगर निगम ने शहर को आगे ले जाने की जगह पीछे धकेल दिया है।
शर्म आती है जब दिल्ली से लोग फोन कर पूछते हैं कि शिमला आने लायक है या नहीं, पानी और सफाई का क्या हाल है। मधू सूद ने बताया कि सफाई का काम आउट सोर्स करने के लिए नगर निगम ने सैहब कर्मियों को निकाल दिया है।
लोगों को साढ़े तीन बजे गाड़ी में कूड़ा देने के लिए कहा जा रहा है। बुजुर्गों और नौकरीपेशा लोगों के लिए दिक्कत खड़ी हो गई है। कनलोग, शिवपुरी और केएनएच में सड़क पर कचरे के बोरे पड़े हैं। लोग मजबूरी में खुली ढलानों पर कूड़ा ठिकाने लगा रहे हैं। सफाई व्यवस्था गड़बड़ाने से बंदरों का आतंक बढ़ गया है।