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योग के मंच पर छलका आडवाणी का दर्द, जानें क्या कहा?

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने इमरजेंसी लगने की आशंका का बयान देने के बाद पालमपुर में अपना सियासी दर्द फिर बयां किया है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर पालमपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 में लोस चुनाव में करीब 300 प्रत्याशी उतारे गए थे। लेकिन, जीते सिर्फ 2 प्रत्याशी। इस कारण वह वर्ष 1984 भूल नहीं सकते। पांच साल बाद जब फिर चुनाव हुए तो पार्टी को दो के स्थान पर 86 सीटें प्राप्त हुईं।
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उसके बाद बढ़ते-बढ़ते हम उस स्थान पर पहुंचे जब पार्टी को लोकसभा में बहुमत मिला और अटल बिहारी वाजपेयी पीएम बने। पार्टी को इस स्तर पर पहुंचाने के लिए वाजपेयी ने उन्हें ‘मैन आफ द ईयर’ के सम्मान से नवाजे जाने की घोषणा की थी। आडवाणी के अनुसार उस दौरान उन्होंने कहा था कि जीत सिर्फ मेरी वजह से नहीं, बल्कि पार्टी के असंख्य लोगों के परिश्रम के कारण मिली।
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पुस्तकें और चॉकलेट बड़ी कमजोरी

आडवाणी ने कहा कि वे 14 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़े। भारतीय जनसंघ के सदस्य रहे। 1975 में इमरजेंसी के खिलाफ मोर्चा संभाला। उनकी सबसे बड़ी कमजोरी पुस्तकें और चॉकलेट है। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद अपनाने पर जोर देने के साथ आडवाणी ने आरएसएस और भाजपा की कट्टर हिंदुत्ववाद की झलक भी पेश की।

भाषण की अंतिम पंक्तियों में आडवाणी ने योग पर मोदी की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र भाई मोदी ने तय किया कम से कम 21 जून को लोगों को याद दिलाएंगे कि देश में चिकित्सा की दृष्टि से कोई कमी अब नहीं रहेगी। इसी कड़ी में 21 जून को विश्व भर में योग दिवस मनाया गया।
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