इसके बाद सदस्यों की सहमति पर पर्ची सिस्टम अपनाया गया। एक पर्ची को उपायुक्त ने उठाया। पर्ची विमला देवी के नाम की निकली। इस प्रकार उन्हें नया अध्यक्ष घोषित किया गया। बता दें कि वर्तमान में जिला परिषद में भी भाजपा समर्थित आठ और कांग्रेस समर्थित छह सदस्य हैं। पांच माह के बाद खत्म हुआ ड्रामाजिला परिषद पर कब्जे की लड़ाई मार्च में शुरू हुई थी। तत्कालीन भाजपा समर्थित अध्यक्ष मुस्कान और उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ। 27 मार्च को बैठक रखी गई।
लेकिन बैठक से एक घंटे पहले दोनों पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा एक माह तक पंचायती राज निदेशक के पास विचाराधीन रहा। नियमानुसार एक माह के भीतर दोनों पदाधिकारी इस्तीफा वापस ले सकते थे और उन्होंने ऐसा ही किया। 19 मई को फिर से अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की गई। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के लिया 1 जून का दिन निर्धारित किया गया। इसी बीच प्रस्ताव के खिलाफ तत्कालीन अध्यक्ष मुस्कान ने प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर की।
लेकिन बाद में याचिका वापस ली और एक बार फिर अविश्वास प्रस्ताव से ठीक एक दिन पहले इस्तीफा दे दिया। लेकिन 1 जून को ही तत्कालीन भाजपा समर्थित उपाध्यक्ष प्रेम सिंह ठाकुर ने अविश्वास का सामना किया, लेकिन उन्हें कुर्सी गंवानी पड़ी। इसके बाद 17 जून को हुए उपाध्यक्ष के चुनाव में भाजपा के ही मान सिंह की जीत हुई। जुलाई में एक बार फिर अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ। इस बार तत्कालीन अध्यक्ष मुस्कान का इस्तीफे वाला दाव नहीं चला और कुर्सी गंवानी पड़ी। अब नई अध्यक्ष के चुनाव के साथ इस ड्रामे का अंत हुआ है।