प्लांट के निर्माण पर खर्च होंगे 12 करोड़ रुपये
15 टन गीले कूड़े का हर रोज होग इस्तेमाल
शहर की कूड़ा कर्कट प्रणाली में होगा सुधार
90 मीट्रिक टन कचरा हर रोज निकलता है संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के भरयाल में 12 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक बायोमैथीनेशन प्लांट का निर्माण कार्य अगस्त में शुरू होगा। यह प्लांट 15 टन गीले कचरे को प्रतिदिन बायो मिथेन गैैस में बदलेगा। इससे शहर में कचरे के प्रबंधन में सुधार होगा।
देश में पहली बार बायोमैथीनेशन प्लांट में मीथेन गैस तैयार कर कचरे से बिजली बनाने की क्षमता को बढ़ाया जाएगा। इस नए प्लांट का मुख्य उद्देश्य भरयाल में स्थित ठोस कचरा प्लांट की समुचित कार्यप्रणाली को सुनिश्चित करना है, जहां वर्तमान में सूखे और गीले दोनों प्रकार के कचरे को संसाधित किया जाता है। बायोमैथीनेशन प्लांट के संचालन से गीले कचरे का प्रभावी निपटारा हो सकेगा। इससे सूखे कचरे के प्रबंधन में भी आसानी होगी और कुल मिलाकर कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक सक्षम तथा पर्यावरण के अनुकूल बनेगी।
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नगर निगम के अनुसार शिमला शहर से रोजाना 80 से 90 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, जिसे भरयाल कूड़ा संयंत्र को भेजा जाता है। भरयाल में मैसर्ज एलीफेंट एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने कूड़ा संयंत्र स्थापित किया है जिसमें कचरे से बिजली तैयार होती है लेकिन भरयाल प्लांट प्लाटिक कचरे से बिजली बनाने के लिए डिजाइन किया था। गीला और सूखा कूड़ा प्लांट में एक साथ आने के कारण प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रहा है। बायोमैथीनेशन प्लांट के बनने के बाद शहर के कूड़े का सही तरीके से निपटारा किया जा सकेगा।
अगले माह शुरू होगी निर्माण प्रक्रिया
प्लांट के निर्माण की प्रक्रिया अगस्त में शुरू होगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। इसमें विभिन्न निर्माण कंपनियां भाग ले रही हैं। शिमला नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि यह प्लांट शहर की व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने कहा कि बायोमिथेनेशन तकनीक के माध्यम से न केवल गीले कचरे का निपटारा होगा बल्कि इससे उत्पन्न बायो मिथेन का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में भी किया जा सकेगा। प्लांट के निर्माण से रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना को शिमला की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। शहरवासी भी इस पहल से उत्साहित हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि इससे शिमला की स्वच्छता तथा स्वास्थ्य में सुधार होगा।
मिल चुकी है मंजूरी : आयुक्त
भरयाल में बायोमैथीनेशन प्लांट लगाने को सरकार से मंजूरी मिल गई है। इस प्लांट के लगने से कूड़ा संयंत्र में कचरे से बिजली बनाने की क्षमता बढ़ जाएगी।
-भूपेंद्र अत्री, आयुक्त नगर निगम शिमला