उन्होंने कहा कि लाहौल घाटी में भारी मात्रा में जैव विविधता पाई जाती है। इसकी 13 प्रजातियां लुप्त होने के कगार पर हैं। इनके संरक्षण के लिए सभी को आगे आना होगा। हिमाचल के लाहौल-स्पीति, कुल्लू, किन्नौर, चंबा तथा शिमला जिलों में करोड़ों रुपये की जैव विविधता पाई जाती है।
इनका संरक्षण करना बेहद जरूरी है। इसके लिए 12 जिलों के 78 विकास खंडों की 3226 ग्राम पंचायतों में जैव विविधता प्रबंधन कमेटियों का गठन किया जा रहा है। अभी तक प्रदेश में 417 ग्राम पंचायतों में यह कमेटियां गठित हुई हैं।