शोधकर्ता डॉ. नवनीत चंद्र वर्मा
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कोशिकाओं में मानव बाल से 80 हजार गुना छोटे बायोकेमिकल भी देखे जा सकेंगे। इससे प्रोटीन, डीएनए और एंजाइम को समझना आसान होगा। इससे प्रोटीन, डीएनए और एंजाइम को समझना आसान होगा। यह संभव होगा सिंगल मोलेक्यूल सुपर रिजोल्यूशन नैनोस्कोपिक तकनीक से, जिसे आईआईटी के पूर्व छात्र डॉ. नवनीत चंद्र वर्मा ने देश में पहली बार विकसित किया है। वह गोरखपुर उत्तर प्रदेश से संबंध रखते हैं और वर्तमान में शोध में जुटे हैं।
इस उत्कृष्ट शोध के लिए डॉ. वर्मा को भारतीय राष्ट्रीय युवा वैज्ञानिक अकादमी (आईएनवाईएएस) के राष्ट्रीय पुरस्कार 2020 से सम्मानित किया है।
आईआईटी मंडी के निदेशक प्रो. अजीत के. चतुर्वेदी ने बताया कि कार्बोनेजेनिक नैनोपार्टिकल की रासायनिक संरचना और कार्य संबंध और सुपर रिजोल्यूशन लाइट माइक्रोस्कोपी में इनके उपयोग की बुनियादी समझ में उत्कृष्ट योगदान के लिए यह सम्मान दिया गया। आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज के प्रो. चयन नंदी के मार्गदर्शन में डॉ. वर्मा ने बताया कि सबसे आधुनिक सिंगल मोलेक्यूल सुपर रिजोल्यूशन नैनोस्कोपिक तकनीक का भारत में पहली बार विकास किया और प्रदर्शित किया है।
यह है तकनीक
शोधकर्ता डॉ. नवनीत चंद्र वर्मा ने बताया कि हम अपनी नग्न आंखों से 80 माइक्रोन तक किसी भी वस्तु की कल्पना कर सकते हैं, जो एक मानव बाल का आकार है। हालांकि, सुपर रिजोल्यूशन लाइट माइक्रोस्कोपी का उपयोग करके नैनोमीटर स्तर में मानव कोशिका के अंदर प्रोटीन, डीएनए, एंजाइम जैसे छोटे बायोमोलेक्यूल्स की छवि बनाई जा सकती है, जो मानव बाल से लगभग 80,000 गुणा छोटा है। इस तकनीक में एक फ्लोरोसेंट जांच अणु छवि कैपचर करने के लिए मानव कोशिका के अंदर पहुंचती है।