सामरिक महत्व और पर्यटन विकास के लिए बहुप्रतीक्षित 465 किलोमीटर लंबी बिलासपुर-मनाली -लेह रेललाइन इको फ्रेंडली होगी। हिमाचल में तैयार बिजली से ही विश्व की सबसे ऊंची रेललाइन पर रेल दौड़ाई जाएगी। प्रदूषण रहित रेललाइन से प्रदेश के पर्यावरण को खतरा नहीं होगा। रडार सर्वे के लिए पहुंचे रेलवे विभाग ने इस पर काम शुरू कर दिया है। टीम ने रेल ट्रैक की जियोलॉजिकल मैपिंग भी शुरू कर दी है। रेल की पटरी जहां से गुजरेगी, वहां भूमि की मजबूती का आकलन किया जाएगा।
लेह से बिलासपुर तक चार अलग-अलग टीमें इस पर काम कर रही हैं। रेलवे विभाग रडार सर्वे की रिपोर्ट समय से पहले यानी 25 सितंबर को ही सबमिट करने जा रहा है। सूचना है कि रडार सर्वे रेलवे विभाग की अपेक्षाओं पर खरा उतरा है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद दुनिया की यह सबसे ऊंची रेललाइन होगी। इस रेल सेक्शन पर ट्रेन 75 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ेगी। इसके बनने से दिल्ली-लेह के बीच सफर का समय 40 से घटकर 20 घंटे रह जाएगा।
सुरंग के अंदर केलांग में बनेगा देश का पहला रेलवे स्टेशन
देश में पहली बार सुरंग के भीतर रेलवे स्टेशन बनेगा। यह स्टेशन हिमाचल में चीन सीमा के पास समुद्र तल से 3 हजार किमी की ऊंचाई पर सुरंग में 30 किमी भीतर होगा। दिल्ली और अन्य मेट्रो शहरों में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में कई स्टेशन सुरंग के अंदर पहले से ही हैं, लेकिन मुख्य रेलवे लाइन में सुरंग के अंदर बनने वाला केलांग देश का पहला रेलवे स्टेशन होगा। रेललाइन के लिए पहले चरण का सर्वे पूरा हो चुका है। बिलासपुर-मनाली-लेहरेल लाइन के करीब 30 स्टेशन होंगे। बिलासपुर और लेह को जोड़ने वाली यह लाइन सुंदरनगर, मंडी, मनाली, केलांग, कोकसर, दर्चा, उपशी और कारू से गुजरेगी। सभी स्टेशन हिमाचल, जम्मू और कश्मीर के होंगे।
सा 2022 तक शुरू होगा काम
परियोजना निदेशक हरपाल सिंह ने कहा कि बिलासपुर-मनाली-लेह रेल सेवा पूरी तरह इलेक्ट्रिफाइड होगी। यहां रेल बिजली से दौड़ेगी। इससे प्रदूषण नहीं होगा। 25 सितंबर को रडार सर्वे की रिपोर्ट सबिमट की जाएगी। जियोलॉजिकल मैपिंग हो रही है। 2022 तक तमाम स्वीकृतियों के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।