ऋषिकेश-भगेड़-बिलासपुर सड़क पर हुई बस दुर्घटना में अपनी जवान बेटी के दुनिया से रुखसत हो जाने पर एक मां सुधबुध खो बैठी हैं। बेटी के जाने के गम में तीन दिन से मां ने अन्न का दाना तो दूर पानी का घूंट भी नहीं पिया। अब तो महिला का स्वास्थ्य भी बिगड़ गया है। महिला को उपचार के लिए घुमारवीं अस्पताल में भर्ती किया गया है।
राहियां का दर्दनाक हादसा कभी न भरने वाले जख्म दे गया है। ताउम्र यह हादसा एक नासूर बनकर लोगों को दर्द देता रहेगा। शरीर पर लगे जख्म भले ही भर जाएं लेकिन, अपने जिगर के टुकडे़ अब कहां से मिल पाएंगे। बेटी के गुजरने से आहत बैहनाजट्टां की रामेश्वरी अपनी सुधबुध खो बैठी हैं। इस मां को अपनी तक कोई खबर नहीं है।
जब से पता चला है कि कॉलेज को गई उसकी बेटी अब कभी वापस नहीं लौटेगी, तब से इस मां के हलक से एक निवाला तक नहीं उतरा है। राहियां हादसे के दो दिन पहले ही घास काटने वाली मशीन में बेटे का हाथ जख्मी हुआ था। घटना में बेटे की अंगुलियां कट गई हैं।
शिमला में इलाज कर मंगलवार को बेटा घर लौटा तो उसके हाथों को देख कर इस मां का दिल पसीज गया। अभी यह जख्म भरे भी नहीं थे कि उन्हें ऐसा जख्म मिला जो शायद कभी भरा न जा सके। रामेश्वरी की बेटी पूजा सुबह घर से कॉलेज के लिए निकली थी। लेकिन, बस दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गई।