धर्मशाला और पच्छाद उपचुनाव की तरह ही पार्टी के नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर भी भाजपा हाईकमान राजनीतिक पंडितों को अचंभित कर सकता है। त्रिलोक जंवाल, रणधीर शर्मा, राजीव भारद्वाज, राम सिंह की चर्चाओं के बीच अचानक अब उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर का नाम प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में आगे आया है।
भाजपा के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो दिन पहले उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर को दिल्ली बुलाया था। बताया जा रहा है कि नड्डा ने उनके साथ प्रदेश अध्यक्ष सहित सूबे के अन्य राजनीतिक समीकरणों पर बात की है। सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर बिक्रम ठाकुर के नाम पर सहमति जताई है।
उद्योग मंत्री बिक्रम ठाकुर ने भी माना कि दो दिन पहले वह नड्डा से दिल्ली में मिले हैं। कई राजनीतिक और सांगठनिक मुद्दों पर चर्चा हुई है। प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कोई जानकारी नहीं है। माना जा रहा है कि मंडी को मुख्यमंत्री पद देने के बाद हाईकमान सूबे के सबसे बड़े जिला कांगड़ा को सशक्त करने के लिए प्रदेशाध्यक्ष पद दे सकता है, ताकि मिशन रिपीट किया जा सके।
चूंकि, जसवां परागपुर विस क्षेत्र के विधायक होने के नाते बिक्रम ठाकुर कांगड़ा जिला का प्रतिनिधित्व करते हैं। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में हाईकमान बीच का रास्ता अपनाकर धूमल, नड्डा, शांता गुटों के प्रभाव को धूमिल कर सकता है। हालिया राजनीतिक परिदृश्य में बिक्रम ठाकुर की निष्ठाएं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के साथ ज्यादा बढ़ी हैं।
इसलिए भी बन रहे सियासी समीकरण
पिछले 7 साल से सतपाल सत्ती के रूप में प्रदेश अध्यक्ष का पद हमीरपुर संसदीय क्षेत्र को मिला था। धूमल के रूप में मुख्यमंत्री पद भी इसी संसदीय क्षेत्र को मिला था, जबकि, मंडी संसदीय क्षेत्र को मुख्यमंत्री पद मिला है। ऐसे में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र बड़े पद से अभी वंचित है जिसकी भरपाई की रणनीति बनाई जा रही है।