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बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, सरकार ने 17 आईएएस अफसरों के विभाग बदले

Tue, 02 Jan 2018 01:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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शिमला में मुख्य सचिव विनीत चौधरी का मुंह मीठा करातीं उनकी पत्नी उपमा चौधरी। आईएएस उपमा लाल बहादुर शास्‍त्री अकादमी मसूरी में बतौर निदेशक सेवाएं दे रही हैं। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल सरकार ने मुख्य सचिव बदलने के बाद अब एक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। वीरभद्र सरकार में कई अहम महकमों का प्रभार देख रहे अपर मुख्य सचिव (एसीएस) तरुण श्रीधर से कार्मिक के बाद अब ऊर्जा और ऊर्जा बोर्ड के चेयरमैन का प्रभार भी वापस ले लिया है।

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श्रीधर अब मत्स्य और पशुपालन विभाग देखेंगे। अपर मुख्य सचिव श्रीकांत बाल्दी, मनीषा नंदा, अनिल कुमार खाची और तरुण कपूर को और महकमे दिए गए हैं। प्रधान सचिवों में आरडी धीमान, जेसी शर्मा और ओंकार शर्मा को बड़े विभागों का जिम्मा दिया गया है। सरकार ने 17 आईएएस अफसरों के विभागों में फेरबदल का आदेश दिया।

अतिरिक्त मुख्य सचिवों में श्रीकांत बाल्दी को वित्त, योजना, अर्थशास्त्र और सांख्यिकी के बाद अब कृषि का भी अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

मुख्यमंत्री की प्रधान सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा को पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना एवं जनसंपर्क, पर्यटन और नागरिक उड्डयन की जिम्मेदारी दी गई है। एसीएस अनिल कुमार खाची को लोक निर्माण और सहकारिता के बाद प्रदेश सेल्स टैक्स ट्रिब्यूनल का चेयरमैन भी बना दिया गया है।

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तरुण कपूर को शहरी विकास और आवास का प्रभार

एसीएस तरुण कपूर से पर्यावरण, साइंस एंड टेक्नोलॉजी, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले और उद्योग विभाग लेकर अब उन्हें वन, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, शहरी विकास और आवास का प्रभार दिया है। एएसीएस निशा सिंह को आयुर्वेद के साथ श्रम एवं रोजगार महकमा भी दिया गया है।

तकनीकी शिक्षा, परिवहन और शिक्षा प्रधान सचिव संजय गुप्ता के पास तकनीकी शिक्षा, युवा सेवाएं एवं खेल विभाग और परिवहन महकमा दिया है। प्रधान सचिव श्रम एवं रोजगार, आईपीएच, कृषि, प्रशिक्षण और कार्मिक आरडी धीमान को अब कार्मिक, ऊर्जा, सहकारिता और उद्योग विभाग के साथ बिजली बोर्ड का चेयरमैन भी बना दिया है।

प्रधान सचिव गृह, सतर्कता, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रबोध सक्सेना अब स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के प्रधान सचिव होंगे। प्रधान सचिव बागवानी, आबकारी एवं कराधान जगदीश चंद्र शर्मा को पुराने महकमों के साथ सूचना प्रौद्योगिकी, गृह और सतर्कता विभाग का जिम्मा दिया है।

प्रधान सचिव ओंकार शर्मा को खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले

प्रधान सचिव ओंकार शर्मा अब खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले और राजस्व के साथ जनजातीय कल्याण विभाग दिया गया है। एमडी ऊर्जा निगम और सचिव आईपीएच देवेश कुमार से आईपीएच महकमा हटा दिया है।

आयुक्त विभागीय जांच अरुण शर्मा को सचिव शिक्षा की जिम्मेदारी दी है। मंडलायुक्त शिमला रविंद्र नाथ बत्ता मंडलायुक्त बने रहेंगे। इसके साथ रजिस्ट्रार सहकारी सोसाइटी, सचिव योजना और प्रोजेक्ट मानिटरिंग मुख्यमंत्री का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है।

सचिव प्रशासनिक सुधार डा. पूर्णिमा के पास भाषा, कला और संस्कृति का जिम्मा रहेगा। आर सेलवम को आबकारी और कराधान आयुक्त तैनात किया गया है।

उनके पास से कुछ महकमों का अतिरिक्त चार्ज ले लिया गया है। सचिव राज्यपाल राजेश शर्मा को निदेशक उद्योग का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। इसके अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव आईएफएस संजय सूद को उनके मूल कैडर में वापस भेज दिया है।
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वीरभद्र सरकार के पसंदीदा अफसर को वापस नौणी भेजा

जयराम ठाकुर सरकार ने पूर्व वीरभद्र सरकार के पसंदीदा अधिकारी रहे डा. एचएस बावेजा को वापस डा. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी भेज दिया है। डा. बावेजा हिमाचल प्रदेश कृषि उत्पाद विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक (एमडी) थे। अब उनके स्थान पर बतौर प्रबंध निदेशक राजेंद्र वर्मा की नियुक्ति की गई है।

राजेंद्र वर्मा राज्य कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक के पद पर रह चुके हैं। डा. एचएस बावेजा पूर्व वीरभद्र सरकार में न केवल मार्केटिंग बोर्ड के प्रमुख रह चुके हैं, बल्कि वे राज्य बागवानी विभाग के निदेशक भी रहे हैं। जब उन्हें विभागीय अधिकारियों को अनदेखा करते हुए बागवानी महकमे का निदेशक बनाया गया तो तत्कालीन बागवानी मंत्री तक ने इस नियुक्ति का विरोध किया।

विद्या स्टोक्स डा. एचएस बावेजा के स्थान पर अपनी पसंद का निदेशक तैनात करना चाहतीं थीं। सूत्रों ने बताया कि डा. बावेजा की राज्य सरकार के एक शीर्ष अधिकारी से भी कई बार तनातनी हो चुकी है।

ये अधिकारी पूर्व सरकार के कार्यकाल में विद्या स्टोक्स के करीबी थे तो इस सरकार में भी काफी शक्तिशाली जगह पर तैनात हैं। डा. बावेजा के ऐसे कई विरोधी उन्हें मार्केटिंग बोर्ड से बाहर का रास्ता दिखाने में सरकार बदलने के बाद कामयाब हो गए। प्रतिक्रिया के लिए डा. बावेजा को फोन किया गया तो वे उपलब्ध नहीं हुए। 
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