भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन (फाइल फोटो)
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हिमाचल प्रदेश में भानुपल्ली-बिलासपुर-बैरी रेललाइन के लिए श्री नयनादेवी विस क्षेत्र से बिलासपुर के बध्यात तक 26 गांवों की सामाजिक प्रभाव आकलन (एसआईए) स्टडी पूरी हो चुकी है। टीम ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। सामाजिक प्रभाव आकलन के दौरान 26 में से तीन गांवों की भूमि का पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया गया है। अब बध्यात तक 23 गांवों में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पारदर्शिता के अधिकार अधिनियम 2013 के तहत जमीन अधिगृहीत की जाएगी।
बध्यात गांव तक उक्त 26 गांवों के लोग जमीन अधिग्रहण के लिए मनमाने दाम की मांग कर रहे थे। रेलवे की भूमि अधिग्रहण इकाई की सहमति न बनने पर प्रशासन ने इन गांवों की एसआईए स्टडी के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा था। करीब तीन माह पहले सरकार की तरफ से एक टीम ने 26 गांवों की एसआईए स्टडी शुरू की थी। एसडीएम सुभाष गौतम ने बताया कि तीन गांवों में जमीन के दामों पर सहमति बनने के बाद इनका पूरी तरह अधिग्रहण कर लिया गया है। अन्य 23 गांवों की रिपोर्ट सरकार को भेजी है। अब भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के तहत ही इन गांवों की जमीनों का अधिग्रहण होगा।
डीसी पंकज राय ने बताया कि इस बीच अगर लोग भूमि अधिग्रहण के लिए मान जाते हैं तो उनकी जमीन का अधिग्रहण अधिनियम के तहत नहीं होगा। बता दें कि इन 26 गांवों में से तीन गांवों नई सारली, भराड़ी और कांगूवाली में जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। अब बध्यात तक 588 बीघा भूमि का अधिग्रहण रेललाइन के लिए बचा है। इसका अधिग्रहण एक्ट के तहत होगा। अब प्रशासन ने बध्यात से आगे बरमाणा तक 9 गांवों की फाइल सरकार को भेजी है। इन गांवों में 538.9 बीघा भूमि का अधिग्रहण रेललाइन के लिए होना है। इनमें नोग, बल्ली बिल्ला, बल्ली जलेडा, भराथू, भटेड़ उपरली, बरमाणा और बग्गड़ शामिल हैं।