दशहरा उत्सव में कुष्टू काहिका की विधि पूरी होते ही बारिश शुरू हो गई। दशहरा में तीसरे दिन बारिश के बीच भगवान नरसिंह की दूसरी जलेब निकली। वाद्ययंत्रों की थाप पर निकली जलेब को देखने के लिए लोगों का बारिश के बीच भी उत्साह कम नहीं हुआ। राजा की चानणी से निकली जलेब के माध्यम से नरसिंह भगवान ने ढालपुर में रक्षा सूत्र बांधा।
जलेब में भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में भी सवार हुए। जलेब में सैंज घाटी के देवताओं ने शामिल होकर इसकी शोभा बढ़ाई। राजा की चानणी के पास देवलुओं ने कुल्लवी नाटी डाली। इससे पहले राजा की चानणी के पास सैंज में रैला के देवता लक्ष्मी नारायण, माता आशापुरी, देवता मनु ऋषि और भूपन के रिंगू नाग ने एक-दूसरे से भव्य देवमिलन किया। करीब सवा चार बजे राजा की चानणी से ढोल-नगाड़ों के साथ जलेब निकली।
जलेब में सबसे आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी चली। तलवार और ढाल को पकड़कर भगवान रघुनाथ के मुख्य छड़ीबरदार महेश्वर सिंह पालकी में सवार हुए। पालकी के दोनों ओर देवता चले। राजा की चानणी से अस्पताल रोड, पुराना स्टेट बैंक पार्क, कलाकेंद्र के पीछे ढालपुर चौक होकर राजा की चानणी के पास जलेब का सिलसिला थम गया।
इस दौरान जिस भी रास्ते से जलेब निकली, अस्थायी शिविरों में बैठे सभी देवी-देवताओं ने शेष फूल भी दिए। जिला देवी-देवता कारदार संघ के महासचिव नारायण चौहान ने कहा कि दशहरा उत्सव में जलेब आकर्षण का केंद्र रहती है। प्रतिदिन निकलने वाली नरसिंह भगवान की इस जलेब में हर दिन अलग-अलग क्षेत्रों के देवता शामिल हो रहे हैं। देवी-देवताओं की उपस्थिति से ढालपुर मैदान देवलोक में बदल गया है।