बेटे को ही बुढ़ापे का सहारा मानने वाले समाज पर 14 साल की नेहा के हौसले और पितृ प्रेम ने जोरदार प्रहार किया है। छोटी सी उम्र की नेहा बीमारी के कारण पिछले तीन साल से बिस्तर पर पड़े अपने पिता का सहारा बन गई हैं।
जो बेटे अपने पिता के परंपरागत पेशे को अपनाने से परहेज कर रहे हैं, उसी पेशे को अपनाकर नेहा अपने पिता का इलाज करवाने के साथ परिवार की आर्थिकी को संबल दे रही हैं। हिमाचल के ज्वालाजी मंदिर के मुख्य द्वार पर पिता की भांति नगाड़ा बजाकर नेहा पारिवारिक परंपरा को तो निभा ही रही हैं।
साथ ही पिता की बीमारी का इलाज भी करवा रही हैं। दुनिया भर से मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भी नेहा के इस हौसले को सलाम कर रहे हैं।
बेटी निभा रही पिता की परंपरा
14 वर्षीय नेहा के लिए यह वक्त पढ़-लिखकर आगे बढ़ने का है, लेकिन पिता की बीमारी के बाद वह अपनी मर्जी से नगाड़ा बजाने के लिए मंदिर पहुंच गईं। नेहा ने उसी परंपरा को निभाने की ठान ली, जिसे उसके पिता आज दिन तक निभाकर परिवार का पालन पोषण करते आए हैं।
ज्वालाजी शहर की रहने वाली नेहा के पिता विधि चंद पिछले करीब तीन वर्षों से एक दुर्घटना में घायल होने के चलते बिस्तर पर हैं। मंदिर में मां के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु मनप्रीत, सुरीली, रीनू ठाकुर, गरिमा, दिव्येश, गुरमीत कहते हैं कि मां के दर्शनों से पहले मुख्य द्वार पर कन्या के दर्शन से असीम आनंद की अनुभूति प्राप्त होती है। बेटी को कोख में ही मारने वालों के मुंह पर यह बड़ा तमाचा है।
ऐसी बेटी पर हर किसी को नाज
नेहा कहती हैं कि वह अपनी खुशी से बुजुर्गों की इस परंपरा को निभाने के लिए तैयार हुई हैं। उन पर परिवार का कोई दबाव नहीं है। यह मेरे लिए फख्र की बात है कि मैं मुश्किल घड़ी में परिवार के काम आ सकूं। सहायक मंदिर आयुक्त एवं एसडीएम ज्वालामुखी संजीव कुमार का मानना है कि नेहा के जज्बे पर हर किसी को नाज होना चाहिए।
जो लोग बेटी पैदा होने पर शोक मनाते हैं, उन्हें नेहा के जज्बे से सीख लेनी चाहिए। समाज को समझना होगा कि बेटी बोझ नहीं बल्कि सहारा होती है। व्यापार मंडल ज्वालाजी के प्रधान अनीश सूद ने कहा कि नेहा को सम्मानित किया जाएगा। नेहा के परिवार की हरसंभव मदद की जाएगी।