1975 में इसमें फल आने के बाद से लगातार 15 साल तक कृषि फल प्रदर्शनी कुल्लू में प्रथम पुरस्कार लेते रहे। उन्होंने अनार की कलमों से पौधे तैयार कर क्षेत्र और बाहर लोगों को इसे मुफ्त में बांटकर अनार की खेती को बढ़ावा दिया।
प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी (पीबीईओ) के पद से सेवानिवृत्त होतम सिंह ने अनार के साथ सेब, आलूबुखारा, नाशपाती फसलों को भी नए तरीके से उगाना लोगों को सिखाया।
उन्होंने 1974 में पहली बार क्षेत्र में जर्सी नस्ल की गाय पाली और 2018 तक पालते रहे। इन्हीं को देखकर उन्होंने लोगों को भी गाय पालने के लिए प्रेरित किया। वे चौधरी चरण सिंह किसान सहित कई पुरस्कार प्राप्त कर चुके हैं।
होतम सिंह ने 1969 में कुल्लू घाटी में वाणिज्यिक स्तर से अनार की खेती शुरू की। इसमें नई तकनीकों का इस्तेमाल किया। आसपास के गांव के किसानों को बागानों में जीनोटाइप रोपण सामग्री आपूर्ति और जानकारी मुहैया की।
कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा की तकनीकी सहायता और नाबार्ड से वित्तषोषण कर साथी किसानों को कृषि प्रौद्योगिकी के बारे जागरूक करने को स्वयंसेवी वाहिनी की स्थापना की।