शहर के रिज मैदान और मालरोड हेरिटेज क्षेत्र में नगर निगम स्थापित कर रहा है सात अजूबों की कलाकृतियां, बिना मंजूरी लगाने हुआ है विवाद हेरिटेज कमेटी को पत्र लिखकर निगम ने किया आग्रह अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के हेरिटेज क्षेत्र रिज मैदान और मालरोड पर दुनिया के सात अजूबों की कलाकृतियां लगाने का काम फिलहाल रोक दिया है। योजना पर विवाद बढ़ने के बाद नगर निगम ने इन्हें लगाने का काम फिलहाल रोक दिया है। निगम ने हेरिटेज कमेटी को भी पत्र लिखकर अनुमति देने की मांग की है।
नगर निगम कार्यालय से सोमवार को इस बारे में हेरिटेज कमेटी को पत्र भेजा है। अब मंजूरी मिलने के बाद ही मालरोड और रिज मैदान पर सात अजूबों की कलाकृतियों को स्थापित करने का काम शुरू होगा। इसके अलावा नगर निगम मालरोड पर लगने वाले कई अजूबे यहां से शिफ्ट भी करने जा रहा है। मालरोड पर आशियाना रेस्तरां के पास लगने वाले अजूबे को अब दादा-दादी पार्क में स्थापित किया जाएगा। इस बारे में महापौर सुरेंद्र चौहान ने सोमवार को दिशा निर्देश भी जारी कर दिए हैं। हालांकि स्कैंडल पॉइंट, रोटरी टाउन हॉल और मॉम च्वाइस के पास अजूबे लगाने के लिए रैंप तैयार हो चुके हैं। यहां पर भी अब हेरिटेज कमेटी की मंजूरी के बाद ही अजूबों की कलाकृतियां स्थापित की जाएंगी।
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नगर निगम इसी महीने इन कलाकृतियों को स्थापित कर अनावरण करने की तैयारी कर रहा था। अब इसके लिए मंजूरी का इंतजार करना पड़ेगा। शहर के कई लोग, पूर्व पार्षद और इतिहासकार निगम की इस योजना पर सवाल उठा रहे हैं। उधर महापौर सुरेंद्र चौहान ने कहा कि शहर के सौंदर्यीकरण के लिए यह पहल की है। शहर में बेकार पड़े लोहे से इन कलाकृतियों को तैयार किया है। इसका मकसद लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देना, बेकार चीजों का दोबारा इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। कहा कि इन्हें स्थापित करने से पहले सभी से बात की जाएगी। सभी जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी की जाएंगी।
नियमानुसार ही करेंगे काम
शहर के मालरोड और रिज पर अभी यह कलाकृतियां स्थापित नहीं की हैं। इन्हें सिर्फ रखा गया है। नगर निगम आने वाले दिनों में इन्हें स्थापित करने जा रहा है। इससे पहले सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। हेरिटेज कमेटी से भी मंजूरी ली जा रही है।
विरोध में उतरे भाजपा पार्षद
शहर के मालरोड और रिज मैदान पर सात अजूबों की कलाकृतियां स्थापित करने की योजना पर अब भाजपा पार्षद भी विरोध में उतर आए हैं। इनका कहना है कि निगम प्रशासन ने सदन में भी इस प्रस्ताव चर्चा नहीं की। इसके अलावा जरूरी औपचारिकताएं भी पूरी नहीं की गईं। इस बार नगर निगम सदन में भी पार्षद इस पर विरोध जता सकते हैं।