हस्त शिल्प एवं हथकरघा निगम की ओर से क्षेत्र के करीब 200 लोगों को बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण एक्सपर्ट के माध्यम से दिया जा रहा है। हुनर सीख रहे प्रशिक्षुओं को 300 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से दिए जा रहे हैं।
यह प्रोजेक्ट 4 करोड़ का जिसे चार वर्ष तक चलाया जाना है। एक बांस की नाल से करीब 2 हजार रुपये के उत्पाद तैयार किए जाते हैं। बांस से बने उत्पाद अब चीन, दक्षिण अफ्रीका, हांगकांग, जर्मनी इत्यादि देशों की शोभा बढ़ाएगा।
प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर राकेश कुमार ने बताया कि बांस से बने सामान की प्रदेश और देश के अलावा विदेशों से भी मांग आ रही है। सरकारी स्तर पर दिल्ली, मुंबई और लोकल मेलों में विदेशी मेहमानों से लिंक बनते हैं, जहां से डिमांड आने लगती है। बांस के फर्नीचर पर बोरेक्स व बोरिक एसिड का केमिकल लगता है। जिससे कीड़ा नहीं लगता।
मंदिर, फोटो फ्रेम, डस्टबीन, फ्लावर पॉट, डाइनिंग सजावट, टी कोस्टर, पैन स्टैंड, सुराही, लैंप शेड, स्टूल, सोफासेट, कुर्सियां आदि उत्पाद पीएमओ कार्यालय की शोभा बढ़ा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम के उपाध्यक्ष संजीव कटवाल ने कहा कि पीएमओ में धर्मपुर केंद्र में बना फर्नीचर जा रहा है। पीएम की इस फर्नीचर में खास रुचि है।
ट्रंप को भी हिमाचली उत्पाद उपहार में दे चुके हैं पीएम
पीएम की हिमाचल के देसी उत्पादों में रुचि जगजाहिर है। जून 2017 मे व्हाइट हाऊस में अमेरिका के राष्ट्रपति और उनकी धर्मपत्नी के साथ भेंटवार्ता में पीएम ने मंडी में बना सिल्वर ब्रेसलेट, कांगड़ा चाय, शहद और कुल्लू शाल का एक गिफ्ट हैंपर दिया था।