प्रदेश की 4000 सहकारी सभाओं का हर साल ऑडिट होगा। कई सहकारी सभाओं में कई वित्तीय अनियमितताएं उजागर हो रही हैं। इस गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। कई सहकारी सभाएं निष्क्रिय भी हैं।
सरकार ने सहकारी सभाओं की मनमानी रोकने के लिए फैसला लिया है ताकि प्रदेश में सहकारी सभाओं की स्थिति में सुधार किया जा सके। सहकारी सभाओं की बुनियाद ऊना जिले से पंजावर से डाली गई थी।
इसके बाद से पूरे प्रदेश में सहकारी आंदोलन चलाया गया और सहकारी सभाओं को खोला जाने लगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में चार हजार सहकारी सभाएं हैं। जो सहकारी सभाएं पंजीकरण के बाद निष्क्रिय हैं, उनकोे भी मुख्य धारा से जोड़ना चुनौती से कम नहीं है।
सरकार नए साल से सभी सहकारी सभाओं का वर्ष में एक बार जरूरी ऑडिट कराना सुनिश्चित कर रही है। अभी तक राज्य की सहकारी सभाओं पर ऐसी कोई बंदिश नहीं थी। इसी कमजोरी के कारण सहकारी सभाओं में वित्तीय अनियमितताएं होती रही हैं।
सहकारिता मंत्री राजीव सहजल कहते हैं कि राज्य की सभी सहकारी सभाओं का नए वर्ष से साल में एक बार आडिट अनिवार्य किया जाएगा। इससे सोसाइटियों के कामकाज में पारदर्शिता आएगी।