पंडित गोपाल कृष्ण शास्त्री, अपर सुल्तानपुर (कुल्लू)
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कर्क लग्न की कुंडली में चंद्र, मंगल, गुरु दूसरे भाव में तथा शुक्र, सूर्य पंचम भाव में हों। कर्क लग्न की कुंडली में लग्न में चंद्र तथा सप्तम भाव में मंगल हो। कर्क लग्न की कुंडली में लग्न में चंद्र तथा चतुर्थ में शनि हो। सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य, मंगल तथा बुध ये तीनों कहीं भी एक साथ बैठे हों। सिंह लग्न की कुंडली में सूर्य, बुध तथा गुरु ये तीनों कहीं भी एकसाथ बैठे हों। कन्या लग्न कुंडली में शुक्र व केतु दोनों धनभाव में हों। तुला लग्न कुंडली में चतुर्थ भाव में शनि हो।
तुला लग्न कुंडली में गुरु अष्टम भाव में हो। वृश्चिक लग्न कुंडली में बुध व गुरु कहीं भी एक साथ बैठे हों। वृश्चिक लग्न कुंडली में बुध व गुरु की परस्पर सप्तम दृष्टि हो। धनु लग्न वाली कुंडली में दशम भाव में शुक्र हो। मकर लग्न कुंडली में मंगल तथा सप्तम भाव में चंद्र हो। कुंभ लग्न कुंडली में गुरु किसी भी शुभ भाव में बलवान होकर बैठा हो। कुंभ लग्न कुंडली में दशम भाव में शनि हो। मीन लग्न कुंडली में लाभ भाव में मंगल हो। मीन लग्न कुंडली में छठे भाव में गुरु, आठवें में शुक्र, नवम में शनि तथा ग्यारहवें भाव में चंद्र, मंगल हों तो धनवर्षा होगी।