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कसौली गोलीकांड: आरोपी ने पलटकर पिस्तौल दिखाई तो उल्टे पैर भाग गई पुलिस

Wed, 02 May 2018 01:10 PM IST
संतोष कुमार, अमर उजाला, सोलन
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पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कसौली गोलीकांड ने सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। मौके पर मौजूद पुलिस बल मूक दर्शक बना रहा और आरोपी वारदात को अंजाम देकर जंगल की ओर फरार हो गया। एक पुलिस अधिकारी ने हिम्मत जुटाकर थोड़ी दूर तक पीछा भी किया लेकिन जैसे ही आरोपी ने पलटकर पिस्तौल दिखाया तो यह अधिकारी भी उल्टे पैर लौट आए।  

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कब्जा हटाने गई महिला अफसर की हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लिया संज्ञान, सरकार को लगाई फटकार
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों के मौके पर होने और चार टीमों में तैनात 38 अधिकारियों सहित पुलिस बल के तैनात होने के बावजूद इस घटना से सरकारी तंत्र में हड़कंप मच गया है। एक ओर जिला के भीतर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का कसौली हल्के के साथ लगती दून विधानसभा क्षेत्र में कार्यक्रम था, वहीं दूसरी ओर कसौली में इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।  
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अवैध निर्माण हटाने गई टीम की महिला अधिकारी को होटल मालिक ने मारी गोली, मौत
जैसे ही यह टीम कसौली के मंढोधार में नारायणी गेस्ट हाउस के भवन के पास पहुंची तो वहां सहायक नगर नियोजन अधिकारी कसौली शैल बाला व नारायणी गेस्ट हाउस के मालिक के बेटे विजय ठाकुर के बीच कुछ कहासुनी हुई।
इस कातिल ने मारी महिला अफसर को गोली, बिजली बोर्ड में है बड़े पद पर तैनात
कहासुनी के दौरान होटल के मालिक ने महिला अधिकारी पर गोली चला दी। गोली महिला के सीने पर लगी, जिससे कुछ ही देर बाद उसकी मौत हो गई। महिला अधिकारी को गोली मारने के बाद आरोपी वहां से जंगल की तरफ भाग निकला। कसौली पुलिस की टीमें अब जंगल में फरार आरोपी की तलाश में जुट गई है।

एनजीटी के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में की थी अपील

कसौली में कुछ होटलों, रिजॉर्ट और गेस्ट हाउसों के मालिकों ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के खिलाफ सर्वोच्च न्यायाल में अपील की थी। एनजीटी ने भी अवैध निर्माण गिराने या ऐसे प्रतिष्ठानों को बंद करने के आदेश दिए थे। जब एक होटल की ओर से एक वकील ने हिमाचल के मनाली के संबंधित मामले पर कोर्ट के फैसले का हवाला दिया तो खंडपीठ ने नाराज होते हुए कहा कि या तो वह स्वयं अवैध निर्माण को गिरा दें या फिर संबंधित प्रशासन गिराएगा।

कुछ होटल मालिकों की ओर से पेश वकील समीर सोढ़ी ने एनजीटी के आदेश को लेकर जैसे ही कुछ तथ्य रखे, खंडपीठ ने अवैध निर्माण गिराने पर जोर दिया। जब वकील ने बताया कि एनजीटी के आदेश के मुताबिक एक मंजिल पर अवैध निर्माण गिराने का आदेश दिया है, जिसे पार्किंग एरिया बनाया जाना था। 30 मई, 2017 को एनजीटी ने कसौली में पांच होटलों को अनाधिकृत निर्माण का दोषी पाया और उन्हें गिराने का आदेश दिया। 16 जून 2017 को सर्वोच्च न्यायालय ने एनजीटी के आदेश पर स्टे लगा दिया।

एनजीटी ने इन पांचों होटलों पर पांच से दस लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जिसमें कुल जुर्माना करीब 36 लाख रुपये जमा करवाने के आदेश दिए गए थे। इनमें बर्ड व्यू रिजॉर्ट को पांच लाख, चैलसिया रिजॉर्ट को सात लाख, होटल पाइन व्यू और नारायणी गेस्ट हाउस को भी सात-सात लाख और नीलगिरी होटल को 10 लाख रुपये पर्यावरण मुआवजे के रूप में जमा करवाने के आदेश दिए गए थे। चार अन्य होटलों शिवालिक, तपोवन, ट्रिप्पल ए, दीपशिखा को भी नोटिस जारी किए गए थे। हालांकि कसौली रिजेंसी व कसौली इन होटल की सुनवाई होना शेष है। 

डेढ़ साल से टीसीपी में डेपुटेशन पर सेवाएं दे रही थीं शैल बाला

शैल बाला - फोटो : File Photo
कसौली में हुई महिला अधिकारी की हत्या के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। वारदात की शिकार बनीं सहायक नगर नियोजन अधिकारी शैल बाला मूल रूप से बिलासपुर जिला के घुमारवीं से थीं और सोलन में अपना घर बनाया है। यहां उनके पति एक विभाग में अधिकारी हैं।  

शैल बाला की नियुक्ति बीबीएनडीए (बद्दी बरोटीवाला नालागढ़ विकास प्राधिकरण) में तैनात थीं और करीब डेढ़ वर्ष पहले ही वह टीसीपी विभाग में डेपुटेशन पर आई थीं। वह कसौली में असिस्टेंट टाउन प्लानर के पद पर सेवाएं दे रही थीं और चार टीमों में से गठित एक टीम की समन्वयक थीं।

निदेशक टीसीपी राजेश्वर गोयल ने कहा कि यह बहुत ही अफसोस की बात है कि उनके विभाग की एक महिला अधिकारी की कार्रवाई के दौरान हत्या कर दी गई है।

हिमाचल के दो हजार होटलों में है अवैध निर्माण

प्रदेश के दो हजार से अधिक होटलों ने अवैध निर्माण किया है। सोलन के अलावा शिमला, कुल्लू, चंबा और कांगड़ा जिला में अवैध निर्माण कर बनाए गए होटलों की संख्या अधिक है। नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग की लापरवाही के चलते सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार होटल निर्माण नहीं करने वालों की संख्या प्रदेश में दिनों दिन बढ़ रही है। विभागीय अफसरों की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते नियमों का पालन नहीं हो रहा है। मात्र औपचारिकता के लिए विभाग निरीक्षण करता है। 

उधर, न्यायालय की सख्ती के बाद सरकार अब समाधान तलाशने में जुट गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में सरकार ने पुनर्विचार याचिका दायर की हुई है। अवैध निर्माण को सील करने की राहत देने के फैसले में भी कानूनी पेच फंस गया है। यह मामला हिमाचल हाईकोर्ट में विचाराधीन है। एनजीटी ने कुल्लू-मनाली के करीब 1700 होटलों तथा हाईकोर्ट ने धार्मिक नगरी मणिकर्ण के कसोल के होटलों, रेस्तरा व होमस्टे का निरीक्षण करने के आदेश दिए हैं।

इसमें कसोल में करीब 35 होटल व रेस्तरां को सील किया है। जबकि कुल्लू से मनाली तक एनजीटी के आदेश पर संबंधित विभाग द्वारा जांच का दौर जारी है। पर्यटन विभाग ने करीब 150, प्रदूषण बोर्ड ने 100 तथा टीसीपी ने भी करीब दो दर्जन के करीब होटलों को नोटिस भेजे हैं। अभी तक एनजीटी और हाईकोर्ट ने किसी भी होटल व रेस्तरां को उखाडने के आदेश नहीं दिए हैं। पर्यटन नगरी धर्मशाला के मैक्लोडगंज, भागसुनाग, धर्मकोट, नड्डी सहित अन्य क्षेत्रों में लगभग 275 होटल, गेस्ट हाउस हैं।

हिमाचल हाईकोर्ट ने इसमें से 155 होटलों को अवैध करार देते हुए बिजली-पानी के कनेक्शन काटे हैं। हालांकि जिन होटलों के बिजली-पानी कटा है उन होटलों में कई होटलों का कुछ हिस्से अवैध थे। जिसके कारण उन होटलों को पानी-बिजली पानी काटा गया है। 155 में से 15 होटलों ने अपनी शर्तें पूरी कर ली थी। जिसके बाद उन होटलों का अस्थाई रूप से बिजली-पानी बहाल किया था।
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रसूखदार होटल कारोबारियों में मंत्री, पूर्व मंत्री और विधायक भी

राजधानी शिमला में भी निजी होटलों के निर्माण में भारी अनियमितताएं सामने आ चुकी हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर इसी साल नगर निगम, पर्यटन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के होटलों की जांच की थी। एक महीने चले निरीक्षण के दौरान 18 होटल ऐसे पकड़े गए जिन्होंने तय नक्शे से अधिक निर्माण कर रखा था। नोटिस जारी कर इनके बिजली और पानी के कनेक्शन काटे गए हैं। इनमें पर्यटन निगम का भी एक होटल शामिल है।

हालांकि, इनमें अवैध निर्माण तोड़ने को लेकर अभी कोई कार्रवाई नहीं की गई है। डलहौजी में चल रहे तीन दर्जन अनाधिकृत होटलों और रेस्टोरेंट पर भी जल्द ही प्रशासन का डंडा चलेगा। जिलाधीश चंबा द्वारा इस संदर्भ में जिला पर्यटन अधिकारी चंबा को आदेश जारी किए जा चुके हैं। पर्यटन विभाग द्वारा अपने स्तर पर बिना अनुमति के चल रहे अनाधिकृत होटलों और रेस्टोरेंट बारे की जा रही तफ्तीश के बाद कार्यवाही अमल में लाएगा। जांच पूरी होने पर संबंधित क्षेत्र के एसडीएम के माध्यम से अनाधिकृत होटल व रेस्टोरेंट सील तक किए जा सकते हैं।

प्रदेश के पर्यटक स्थलों में कई होटल कारोबारी अपने राजनीतिक रसूख से नियमों को ताक पर रख रहे हैं। प्रदेश के कई मंत्री, पूर्व मंत्री और विधायक भी इस कारोबार से जुड़े हैं। कई कारोबारियों को राजनीतिक संरक्षण का लाभ मिलता रहा है, जिसके चलते व्यापक पैमाने पर होटलों में मनमाने ढंग से अवैध निर्माण हुआ है। सुप्रीम कोर्ट सहित अन्य अदालतों के होटलों में अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई के आदेशों से अवैध निर्माण के पीछे के गठजोड़ की पोल खुली है।

उधर, सरकारें भी होटल मालिकों को राहत देने के दबाव में रही हैं। अवैध निर्माण को नियमित करने के सरकारों के निर्णय आते रहे हैं। सरकार के स्तर पर अवैध निर्माण रोकने को लेकर स्वत: कभी संज्ञान तक नहीं लिया, जिसकी बड़ी वजह होटल मालिकों की सियासी पहुंच को माना जाता है। बीते एक वर्ष में अवैध होटलों के खिलाफ आए कोर्ट के फैसलों के बाद सरकारी मशीनरी एक्शन मोड में दिखी है।
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