स्कूलों में पढ़ाया जाने वाला गति का दूसरा नियम न्यूटन ने नहीं दिया था। इस तरह 220 देशों में इस नियम को न्यूटन के नाम से पढ़ाना वैज्ञानिक दृष्टि से तर्कसंगत नहीं है।
अमेरिका के टेक्सास स्टेट की सेंट एडबारडज यूनिवर्सिटी में ‘द यूलर सोसाइटी’ की कांफ्रेंस में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में सहायक निदेशक अजय शर्मा ने 22 जुलाई को एक कांफ्रेंस में ये तर्क दिए।
अमेरिका से लौटने पर शर्मा ने यह बात कही है। अजय शर्मा ने रविवार को वर्ष 1687 में लिखी न्यूटन की पुस्तक ‘प्रिंसीपिया’ के नियम के संबंध में सभी तथ्यों का जिक्र किया।
‘प्रिंसीपिया’ में न्यूटन नियम पृष्ठ संख्या 19-20 में दिए गए हैं। न्यूटन ने नियम की परिभाषा कुछ और दी है जबकि स्कूलों में कुछ और ही पढ़ाया जा रहा है।
शर्मा ने कहा कि उन्होंने कांफ्रेंस में इन तथ्यों की विस्तृत व्याख्या की और वैज्ञानिकों के सवालों के सटीक उत्तर दिए।
‘दू यूलर सोसाइटी’ के प्रेजीडेंट न्यूयार्क की अडैल्फी यूनिवर्सिटी के गणित एवं कंप्यूटर विभाग के अध्यक्ष प्रो. राबर्ट ब्रैडली ने लिखित वक्तव्य में अजय शर्मा के शोध कार्य को महत्वपूर्ण और सार्थक बताया।