राजस्व मंत्री महेंद्र सिंह ने सदन को अवगत करवाया कि गत तीन साल में प्रदेश के जिलों में जिलाधीशों के पास लीज पर भूमि लेने के लिए 525 आवेदन मिले है। इनमें 30 आवेदकों को लीज पर जमीन उपलब्ध करवाई गई है। 31 जनवरी तक धारा-118 के तहत 234 मामलों को मंजूरी दी गई है।
कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा के सवाल के लिखित जवाब में मंत्री ने बताया कि प्रदेश में जिन लोगों को धारा 118 के तहत जमीन खरीदने की मंजूरी मिली है और दो साल में काम शुरू नहीं कर पाए हैं, सरकार उन्हें किसी भी तरह की कोई विशेष छूट नहीं देगी। पिछले तीन साल के भीतर प्रदेश में ऐसे 27 आवेदनकर्ता हैं, जिन्होंने दो साल के भीतर काम शुरू नहीं किया है।
वन मंत्री राकेश पठानिया ने कहा कि प्रदेश में आठ चरागाह मार्गों को डिजिटाइज किया गया है। दूसरे मार्गों को भी जल्द डिजिटाइज किया जा रहा है। वे बुधवार को चराई सलाहकार पुर्नावलोकन समिति की 47 वीं बैठक की अध्यक्षता की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। बैठक के दौरान वन मंत्री ने चरवाहों के वन विभाग से संबंधित मुद्दों की समीक्षा की और विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने झुंड के साथ चलने वाले वास्तविक चरवाहों की पहचान करने के निर्देश दिए ताकि उनके पशुधन को चोरी होने से बचाया जा सके।
इनके लिए स्लीपिंग बैग के साथ सोलर मोबाइल चार्जर और कम भार वाले टेंटों का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि चराई परमिट की समय अवधि को तीन वर्ष से बढ़ाकर छ: वर्ष करने के प्रयास किए जाएंगे। इस अवसर पर वूल फेडरेशन के अध्यक्ष त्रिलोक कपूर ने भी विचार रखे। प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन डॉ. सविता ने इस अवसर पर वन मंत्री और अन्य गणमान्य लोगों का स्वागत किया। बैठक में प्रधान सचिव वन रजनीश, पीसीसीएफ वन्य जीव अर्चना, पीसीसीएफ प्रबंधन राजीव कुमार मौजूद रहे।