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एशियन पैरा गेम्स: हिमाचल के निषाद कुमार ने ऊंची कूद में भी जीता स्वर्ण पदक, पढ़ें एथलीट के संघर्ष की कहानी

Tue, 20 Oct 2026 05:42 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला/अंब (ऊना)।।

सार

भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार ने पैरा एशियाई खेलों में असाधारण प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। मंगलवार को उन्होंने दशहरे के पावन अवसर पर 2.04 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर देश को स्वर्ण पदक दिलाकर अपनी मां से दो स्वर्ण पदक जीतने का किया वादा पूरा कर दिया। 
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पैरा एथलीट निषाद कुमार। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बदाऊं गांव के भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार ने पैरा एशियाई खेलों में असाधारण प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। मंगलवार को उन्होंने दशहरे के पावन अवसर पर 2.04 मीटर की ऊंची छलांग लगाकर देश को स्वर्ण पदक दिलाकर अपनी मां से दो स्वर्ण पदक जीतने का किया वादा पूरा कर दिया। सोमवार को निषाद ने पहली बार लंबी कूद में स्वर्ण पदक अपने नाम किया था। इसके साथ ही देश की झोली में ऊंची कूद में भी स्वर्ण पदक जीतकर न केवल भारत को शानदार सौगात दी, बल्कि दोनों स्पर्धाओं में गोल्ड मेडल जीतने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बना दिया। उन्होंने ऊंची कूद टी-47 स्पर्धा में शुरुआत से ही अपनी पकड़ मजबूत रखी। उन्होंने 1.88 मीटर, 1.94 मीटर, 1.98 मीटर और 2.02 मीटर की ऊंचाई को पहले ही प्रयास में पार कर लिया। इसके बाद 2.04 मीटर की छलांग लगाकर न केवल स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। स्वर्ण पदक पक्का करने के बाद उन्होंने 2.06 मीटर की ऊंचाई पार करने का प्रयास भी किया, हालांकि इसमें वह सफल नहीं हो सके। पैरा एथलेटिक्स में लंबी कूद और ऊंची कूद दोनों ही शारीरिक बनावट, तकनीक और गति के लिहाज से अलग तरह की स्पर्धाएं मानी जाती हैं। एक ही संस्करण में इन दोनों विपरीत स्पर्धाओं में हिस्सा लेकर स्वर्ण पदक जीतना एक दुर्लभ उपलब्धि है।

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पहली बार लंबी छलांग में भी जीता गोल्ड
इससे पहले सोमवार को आइची नागोया में पुरुषों की टी-47 लंबी कूद स्पर्धा में उतरे निषाद ने 7.11 मीटर की छलांग लगाकर अव्वल रहे थे। खास बात यह है कि ऊंची कूद में अपनी पहचान बना चुके 27 वर्षीय निषाद पहली बार लंबी कूद की स्पर्धा में उतरे और अपने पदार्पण में ही स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया।  इस स्पर्धा में वह विश्व रैंकिंग में शीर्ष स्थान पर हैं। निषाद की सफलता के पीछे उनके माता-पिता का त्याग भी अहम रहा। बेटे के खेल और खुराक में कमी न आए, इसके लिए किसान पिता रछपाल ने अतिरिक्त मेहनत कर सब्जियां उगाईं, जबकि मां पुष्पा देवी ने मवेशी पालकर दूध बेचा और निषाद के सपनों को पंख दिए।

2,500 रुपये लेकर पंचकूला पहुंचे थे प्रशिक्षण लेने
निषाद कुमार का जीवन संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। बचपन में हाथ कट गया था। इस हादसे ने परिवार को झकझोर दिया, लेकिन निषाद ने अपनी शारीरिक अक्षमता को सफलता की राह में बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने स्कूल के दिनों से ही खेलों में प्रतिभा दिखानी शुरू कर दी थी। सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्होंने ऊंची कूद में राज्य स्तर पर पहला स्थान हासिल किया। बेहतर प्रशिक्षण की तलाश में वर्ष 2017 में निषाद महज 2,500 रुपये लेकर पंचकूला के ताऊ देवीलाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स पहुंचे। वहां कोच नसीम अहमद ने उनकी प्रतिभा और लगन को पहचाना। वर्ष 2019 में निषाद को बंगलूरू के राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर में कोच सत्यनारायण के मार्गदर्शन में अभ्यास का अवसर मिला। इसी वर्ष दुबई में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2021 में उन्होंने दुबई में एशियाई रिकॉर्ड कायम किया और टोक्यो और पेरिस पैरालंपिक में भी उन्होंने रजत पदक अपने नाम किए। खेलों में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
 

मां पुष्पा देवी बोलीं- बेटे ने पूरा किया दो गोल्ड लाने का वादा
एशियाई पैरा खेलों की ऊंची कूद और लंबी कूद स्पर्धा में दोहरे स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाले पैरा एथलीट निषाद कुमार की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से उनके परिवार और क्षेत्र में जश्न का माहौल है। बेटे की इस दोहरी स्वर्णिम कामयाबी पर उनकी माता पुष्पा देवी की खुशी का ठिकाना नहीं है। बातचीत के दौरान भावुक और उत्साहित नजर आईं पुष्पा देवी ने कहा कि आज उनके लिए अत्यंत गर्व और खुशी का दिन है। सोमवार को जब निषाद ने लंबी कूद में पहला स्वर्ण जीता था, तब भी पूरा परिवार बेहद खुश था और मंगलवार को ऊंची कूद में दूसरा स्वर्ण पदक जीतकर उसने इस खुशी को दोगुना कर दिया है। माता पुष्पा देवी ने एक संस्मरण साझा करते हुए बताया कि जब निषाद जापान गया था, तब उसने कहा था कि उसने दो स्पर्धाओं की तैयारी की है। इस पर उन्होंने बेटे से कहा था कि एक ही खेल काफी था, दो स्पर्धाओं में इतनी कड़ी मेहनत और संघर्ष करने की क्या जरूरत है। तब निषाद ने अपनी मां से कहा था कि वह बिल्कुल चिंता न करें, वह इस बार एशियाई खेलों से दो गोल्ड मेडल लाकर ही देगा। आज बेटे ने दोनों स्पर्धाओं में स्वर्ण पदक जीतकर अपना वह वादा पूरा कर दिखाया है। 

निषाद के घर लाैटने पर बनाई जाएगी उसकी पसंदीदा मिठाई
घर वापसी पर निषाद के स्वागत के सवाल पर माता पुष्पा देवी ने बताया कि गांव लौटने पर उसका भव्य और धूमधाम से स्वागत किया जाएगा। घर आने पर निषाद के लिए उसकी सबसे पसंदीदा खीर बनाई जाएगी, क्योंकि उसे खीर बेहद पसंद है। वहीं निषाद के विवाह को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यदि आज योग्य वधू मिल जाए तो वह कल ही उसकी शादी कर दें। निषाद का कद 6 फीट 4 इंच है, जिसके चलते उसके कद के अनुकूल लंबी लड़की की तलाश की जा रही है। जैसे ही सुयोग्य लड़की मिलेगी, वे बेटे के हाथ पीले कर देंगी। निषाद की इस शानदार सफलता पर पूरे गांव और क्षेत्रवासी परिवार को बधाई देने पहुंच रहे हैं। मंगलवार को शाम चार बजकर दस मिनट पर शुरू हुई इस प्रतियोगिता को देखने के लिए निषाद के पिता रछपाल सिंह, माता पुष्पा देवी और बहन रमा देवी सुबह से ही टीवी के सामने बैठे हुए थे।
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देर शाम को परिवार के लोगों ने पटाखे चलाकर खुशी का इजहार किया
पिता रछपाल सिंह, माता पुष्पा देवी, बहन रमा देवी और अन्य रिश्तेदारों की नजरें मुकाबले के दौरान लगातार स्क्रीन पर टिकी रहीं। जैसे ही निषाद ने स्वर्णिम छलांग लगाई, पूरा परिवार खुशी से झूम उठा। देर शाम को परिवार के लोगों ने पटाखे चलाकर खुशी का इजहार किया। बेटे की इस ऐतिहासिक जीत पर भावुक मां पुष्पा देवी ने कहा कि निषाद ने प्रतियोगिता से पहले किया अपना वादा पूरा किया है और दशहरे के पावन अवसर पर उन्हें और पूरे देश को यह शानदार तोहफा दिया है। निषाद की इस ऐतिहासिक कामयाबी के बाद से ही उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया और फोन पर लगातार शुभकामनाएं आने लगीं। शाम को ग्राम पंचायत के उपप्रधान चमनलाल, नरेश कुमार और सुमन लता सहित कई गणमान्य लोग निषाद के घर पहुंचे और परिजनों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरे गांव, पंचायत, प्रदेश और देश के लिए अत्यंत गर्व का दिन है। गांव के बेटे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्षेत्र का नाम रोशन किया है।
 
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