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इंडियन कबड्डी के राइजिंग स्टार हैं ये तीन हिमाचली

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मेहनत, हौसला और कभी हार न मानने की हठ...। इन्हीं इरादों के साथ कबड्डी में कैरियर की शुरूआत करने वाले अजय, पूजा और कविता ठाकुर का आज जमाना कायल हो गया है।
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दक्षिण कोरिया के इंचियोन शहर में तीनों ने भारत के साथ-साथ हिमाचल नाम भी सुनहरी अक्षरों में दर्ज करवा दिया। एशियाड में जीत का जश्न अब हिमाचल पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह से ही कबड्डी के इन तीन सितारों के घर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया।

एक दूसरे को मिठाई खिलाने के बाद आतिशबाजी का दौर शुरू हो गया। तीनों का बेताबी से इनके घर और गांव में इंतजार किया जा रहा है। हर कोई इन्हें पलकों पर बिठाने को तैयार है।
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बेटी की कामयाबी पर नहीं रुके खुशी के आंसू

एशियाड में महिला कबड्डी टीम की सदस्य बिलासपुर की पूजा ठाकुर पर आज सब नाज कर रहे हैं। स्योहला गांव के सतपाल को आज सही मायनों में बेटी है अनमोल का अर्थ पता लग गया है। बेटी की कामयाबी पर खुशी के आंसू रोके नहीं रुके। पिता सतपाल, माता इंद्रा ठाकुर, भाई अजय ठाकुर को पूजा पर नाज है।

कबड्डी की तेज तर्रार रेडर पूजा ने हिमाचल का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया। पूजा मेहनत के दम पर अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बनी हैं। कभी एशियन गेम्स में भाग लेने का सपना रखने वाली पूजा आज गोल्ड मेडलिस्ट टीम का हिस्सा हैं। पूजा के पिता आईपीएच विभाग में बतौर बेलदार सेवाएं दे रहे हैं। बेटी की बदौलत इन्हें अब बिलासपुर, हिमाचल ही नहीं पूरा देश जानने लगा है। मां इंद्रा ठाकुर गृहिणी हैं। पिता सतपाल का कहना है कि उन्हें बेटी पर गर्व है।

तीन अंतरराष्ट्रीय, 21 राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लिया भाग
अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी पूजा ठाकुर तीन बार अंतरराष्ट्रीय और 21 राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। 14 बार हिमाचल की कप्तान रह चुके हैं।

कभी स्कूल को दिलाया गोल्ड, आज देश को

पुरुषों की एशियाड कबड्डी चैंपियन के सदस्य अजय ठाकुर का सफर छठी कक्षा में जोनल स्तर की कबड्डी स्पर्धा में गोल्ड मेडल से शुरू हुआ। अजय ने उसी दौरान साबित कर दिया था कि वो यहीं थमने वाले नहीं हैं। नालागढ़ के बरूणा में जोनल स्तरीय प्रतियोगिता में दभोटा स्कूल ने ट्रॉफी जीती थी। यहीं से अजय का सफर शुरू हुआ।

कॉलेज में बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई के दौरान अजय ने अंतर विवि खेलते हुए कुरुक्षेत्र में हिमाचल को ट्रॉफी दिलाई। उसके बाद चयन साई हॉस्टल बिलासपुर के लिए हुआ। 19 वर्ष की आयु में अजय ने 2005 में इंडिया कैंप में जगह बना ली थी। 2007 में पहली बार इंडोर एशियन गेम्स में भारत की ओर से खेले और झोली में गोल्ड मेडल डाला।

2014 में एशियन गेम्स में हुए मैचों में अजय ने भारत के लिए 25 प्वाइंट अर्जित किए। इस वर्ष प्रो-कबड्डी में अजय ठाकुर काफी मशहूर हो गए थे। पुरुष वर्ग में जैसे ही गोल्ड मिला, पूरा बीबीएन खुशी से झूम उठा। इंडिया के रेडर अजय ठाकुर के गांव दभोटा में लोग खुशी से झूम उठे। अजय ठाकुर के पिता छोटू राम, मां राजेंद्र कौर, भाई अमित ठाकुर, चाचा जयपाल चंदेल व ताया अजमेर सिंह सब काम छोड़ कर मैच देखने बैठ गए थे।

हौसले से गरीबी के अंधेरे को किया रोशन

कबड्डी में भारत की विजेता टीम की सदस्य रही मनाली की कविता ठाकुर के घर बधाइयों का तांता लग गया है। जगतसुख में लड्डू बांट कर जश्न मनाया गया। 10 जनवरी 1993 को पृथ्वी सिंह ठाकुर और कृष्णा सिंह ठाकुर के घर में पैदा हुई कविता ठाकुर ने गरीब परिवार में जन्म लिया।

कविता के माता और पिता ने बताया कि उनकी बड़ी बेटी कल्पना सिंह ठाकुर भी राज्य स्तर तक कबड्डी खेल चुकी हैं। उन्हें कविता पर गर्व है। 2007 में कविता की प्रतिभा को साई हॉस्टल ने पहचाना। पढ़ने-लिखने और रहने का सारा खर्च साई वहन कर रहा है। कविता ने गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल धर्मशाला से जमा दो पास की।

धर्मशाला में ही स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। मनाली वासी कविता के कोरिया से वापस मनाली आने पर ढोल नगाड़ों से स्वागत करेंगे। जगतसुख के प्रधान जोग राज राणा ने बताया कि पंचायत की ओर से कविता का स्वागत किया जाएगा।

होटेलियर एसोसिएशन के चेयरमैन गौतम नाथ ठाकुर प्रधान अनूप राम ठाकुर, मनाली नगर परिषद के प्रधान एंव हिमाचल विंटर गेम्स के प्रधान रूप चंद नेगी, विंटर गेम्स फेडरेशन आफ इंडिया के सचिव रोशन ठाकुर, जिला परिषद चेयरमैन हरिचंद शर्मा, मनाली विधानसभा कांग्रेस अध्यक्ष भुवनेश्वर गौड, मूल प्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता के सलाहकार सायला लामा, प्रधान जय बहादुर ,सचिव पीसल ने कविता को बधाई दी।

दोनों ने एक साथ सीखी हैं कबड्डी की बारीकियां

साई हॉस्टल धर्मशाला की गोल्डन गर्ल्स पूरे देश में छा गई हैं। एशियाड कबड्डी चैंपियनशिप में दोनों को एक साथ खेलने का अनुभव काम आया। हॉस्टल में दोनों ने एक साथ ट्रेनिंग ली है। भारतीय टीम को जीत दिलाने में हिमाचल की पूजा ठाकुर और कविता ने भी अहम भागीदारी निभाई। गोल्डन गर्ल पूजा ठाकुर और कविता ने अपनी पूरी ट्रेनिंग साई हास्टल धर्मशाला में की थी।

साई हास्टल धर्मशाला के कबड्डी कोच एमएस वर्मा ने बताया कि पूजा ठाकुर ने साई हास्टल धर्मशाला में 2004 में एंट्री की थी। पूजा जूनियर इंडिया एशियन चैंपियनशिप में कैप्टन रहने के साथ सीनियर एशिया महिला चैंपियनशिप की खिलाड़ी सदस्य थी। उसने राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल टीम को कई गोल्ड दिलाए। कुल्लू जिले की रहने वाली कविता की हास्टल धर्मशाला में 2009 में एंट्री हुई थी।

कविता ने राष्ट्रीय स्तर पर चार मेडल दिलाए। पिछले साल साउथ कोरिया में उसके टीम में रहते इंडोर एशियन गेम्स में भी भारत को गोल्ड मेडल मिला। कविता ने 2014 में दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय चैंपियन में भाग लिया। साई हास्टल बिलासपुर के सीनियर कबड्डी कोच जयपाल चंदेल का कहना है कि वह 2010 तक साई हास्टल धर्मशाला में थे।
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सीएम ने दी बधाई

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने दक्षिण कोरिया में चल रही 17वीं एशियन खेलों में भारतीय पुरुष और महिला कबड्डी में टीमों को स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह शानदार उपलब्धि है कि दोनों पुरुष और महिला कबड्डी टीमों ने देश के लिए स्वर्ण पदक जीता है। यह हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव की बात है।

पदक विजेता टीमों में महिला टीम में दो खिलाड़ी तथा पुरुष टीम में एक खिलाड़ी हिमाचल से है। महिला कबड्डी टीम में बिलासपुर ज़िले की पूजा ठाकुर और कुल्लू की कविता सिंह तथा पुरुष टीम में नालागढ़ के अजय ठाकुर शामिल हैं। वीरभद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल के खिलाड़ी विभिन्न अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

अब तक प्रदेश के खिलाड़ियों ने तीन पदक लाकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया है। प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को बेहतर अधोसंरचना और कोचिंग सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे भविष्य में प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा खिलाड़ी खेल स्पर्धाओं में और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
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