भर्ती प्रक्रिया में पात्रता की शर्तों को दरकिनार करने के लगे हैं आरोपों
नए शैक्षणिक सत्र में बढ़ सकती है विवि प्रशासन, सरकार की मुश्किलें अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में गणित विभाग के दो सह आचार्यों की नियुक्तियां रद्द करने के न्यायालय के फैसले से माहौल गरमा गया है।
पूर्व भाजपा सरकार और पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई शिक्षकों की भर्तियों में लगातार गड़बड़ियों के आरोप लगते रहे हैं। छात्र संगठन इन सभी भर्तियों की जांच करवाने की मांग करते आ रहे हैं। अब दो नियुक्तियां रद्द होने के बाद यहां अन्य नियुक्तियों की जांच की मांग भी जोर पकड़ने लगी है। विवि में बुधवार को चौतरफा न्यायालय के इसी फैसले को लेकर चर्चाओं का बाजार गरमाया रहा। इसे शिक्षक भर्ती में हुए गोलमाल की परतें खुलने की शुरुआत माना जा रहा है। पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के कार्यकाल में विवि में हुई शिक्षकों की भर्तियों की प्रक्रिया को न्यायालय के गलत ठहराए जाने के बाद हर विभाग में हुई भर्ती की जांच की मांग भी की जा रही है। एसएफआई शिक्षक भर्ती मामले की न्यायिक जांच करवाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने की तैयारी कर रही है।
भर्ती की निष्पक्ष जांच करवाने को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए छात्र संगठन आंदोलन भी कर सकते हैं। एनएसयूआई ने भी न्यायालय के इस फैसले का स्वागत कर भर्तियों की जांच की मांग की है। पूर्व कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार के अगस्त 2018 से लेकर मार्च 2022 तक के कार्यकाल में विवि में 202 से अधिक शिक्षकों की भर्तियां हुई हैं। कार्यवाहक कुलपति प्रो. एसपी बसंल के कार्यकाल में भी विवि में भर्तियां हुईं हैं। अब यह प्रदेश सरकार पर निर्भर हैै कि वह भर्तियों की निष्पक्ष जांच करवाएगी या नहीं।
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आरोपों पर सच साबित हुए : एसएफआई
एसएफआई के राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर और सचिव दीनित देंटा ने कहा कि एसएफआई शिक्षकों की भर्तियों में अपात्र लोगों को रखे जाने को लेकर आंदोलन करती रही है। अदालत ने दो शिक्षकों की नियुक्ति रद्द कर दी है। इससे एसएफआई के लगाए आरोप सच साबित हुए हैं। कहा कि एसएफआई इस आंदोलन को और उग्र कर सरकार को भर्तियों की जांच के लिए दबाव बनाएगी। अपात्र लोगों को भर्ती किए जाने के 13,000 से अधिक भर्ती संबंधित दस्तावेज आरटीआई में जुटाए हैं।
दिसंबर 2020 के बाद की भर्तियों पर सवाल
अदालत ने शिक्षक भर्ती के लिए अपनाई गई प्रक्रिया को गलत करार दिया है। इसमें ईसी में प्रस्ताव पारित कर भर्ती के लिफाफे कुलपति द्वारा खोलने, बाद में ईसी से मंजूरी दिलवाए जाने की प्रक्रिया को भी गलत बताया है। इससे दिसंबर 2020 के बाद हुई भर्तियां भी जांच के दायरे में आ सकती हैं, इससे भर्ती हुए शिक्षकों की नौकरी पर संकट आ सकता है।