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प्रशासन की लापरवाही से बागवानों को करोड़ों की चपत

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शिमला। जिला प्रशासन की लापरवाही से बागवानों को करोड़ों की चपत लगी है। समय से फसल मंडी तक न पहुंचने से बागवानों को सेब औने पौने दामों पर बेचना पड़ रहा है। सेब की क्वालिटी गिरने से दामों में भारी गिरावट आई है। ट्रैफिक जाम के चलते सेब समय से मंडियों तक नहीं पहुंच रहा। 600 से गिरकर रेड गोल्डन सेब के न्यूनतम दाम 300 रुपये प्रति पेटी तक पहुंच गए हैं। इससे बागवानों का खर्चा भी नहीं निकल पा रहा।
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शिमला-ठियोग नेशनल हाइवे पर शुक्रवार को 25 किलोमीटर लंबा जाम लगने के कारण सेब से लदे ट्रक समय से मंडियों तक नहीं पहुंच पाए। जाम में ट्रक फंसने के बाद पराला फल मंडी में कारोबारियों ने सेब खरीदना ही बंद कर दिया। उनका तर्क था कि जो गाड़ियां लोड की है वह शिमला से आगे नहीं पहुंच पाई, जब तक जाम में फंसी गाड़ियां बाहर नहीं निकलती तब तक ओर माल नहीं खरीद सकते। शिमला की भट्ठाकुफर फल मंडी में भी जाम के कारण सेब की गाड़ियां 24 से 28 घंटे बाद पहुंची। शनिवार को भट्ठाकुफर फल मंडी में रेड गोल्डन सेब न्यूनतम 300 से 800 रुपये तक बिका। पहले यही सेब 1500 रुपये प्रति पेटी बिका था। रॉयल सेब 500 से 1700 रुपये के रेट पर बिका। पहले यह सेब 27 सौ रुपये पेटी तक बिक चुका है।
पुलों और सड़कों को सुधारना भूल गया प्रशासन
सैंज-बलग-राजगढ़-सोलन सड़क पर माईपुल में दरारें आने से प्रशासन ने इस पुल से नौ टन से अधिक भार वाले ट्रालों की आवाजाही पर रोक लगा दी। ठियोग की पराला मंडी से होते हुए सेब से लदे ट्राले इसी सड़क से होकर सोलन जा रहे थे लेकिन रोक के बाद सभी ट्राले ठियोग, कुफरी शिमला नेशनल हाइवे पर डायवर्ट हो गए। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। प्रशासन ने सेब सीजन शुरू होने से पहले व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के दावे किए थे, लेकिन माई पुल की जर्जर स्थिति पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। इस कारण अब बागवानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
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सेब ढोने को तैयार नहीं वाहन मालिक
आए दिन लग रहे जाम के कारण बागवानों पर दोहरी मार पड़ रही है। बागवानों का कहना है कि माल खराब होने से जहां रेट गिर रहे हैं वहीं अब वाहन मालिक सेब की ढुलाई के लिए तैयार नहीं हो रहे। शनिवार को सेब बेचने भट्ठाकुफर फल मंडी आए ठियोग के बागवान राजेश शर्मा और सुरेश कोटखाई के सुनील शर्मा, चौपाल के रमन अजटा ने बताया कि पिकअप वाले सेब ढोने को तैयार नहीं है। कहते हैं शिमला मंडी माल पहुंचाने में कई बार दो दिन लग जाते हैं। जाम के कारण समय बरबाद होने से गाड़ी वालों ने किराया भी बढ़ा दिया है।
लो क्वालिटी की वजह से गिरे रेट : हरीश
आढ़ती एसोसिएशन के अध्यक्ष हरीश ठाकुर ने कहा कि लो क्वालिटी के कारण कीमतों में गिरावट आई है। इसके अलावा मैदानी इलाकों में बाढ़ के कारण भी माल का उठान कम हो रहा है। 15 अगस्त के बाद कीमतों में कुछ सुधार की उम्मीद है।
मार्केट में अस्थिरता से गिर रहे रेट : संजय
किसान संघर्ष समिति के सचिव संजय चौहान ने कहा कि सेब सीजन में सरकार और प्रशासनिक अमला पूरी तरह विफल साबित हो रहा है। ट्रैफिक जाम के कारण सेब कभी कम और कभी बहुत ज्यादा मात्रा में मंडियों में पहुंच रहा है। मार्केट में अस्थिरता से रेट गिर रहे हैं जिसका सीधा नुकसान बागवानों को हो रहा है। जाम के कारण सब्जियां भी खराब हो रही हैं।
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