शिमला जिले के मड़ावग के दशोली निवासी बागवान ने 8,400 फीट की ऊंचाई पर अपने बगीचे में सामान्य से दो महीने पहले सेब की फसल तैयार कर रिकॉर्ड बनाया है। बागवान का दावा है कि सेब की परंपरागत किस्मों को स्पर किस्मों में बदलकर तीन तकनीकों के सहारे वह समय से पहले फसल लेने में कामयाब हुए हैं। बागवान ने ग्राफ्टिंग के जरिये तीन सालों में 65 साल पुराने परंपरागत बगीचे में स्पर और गाला किस्में तैयार की हैं।
एसआर डोगरा ऑर्चर्ड के संचालक पवन डोगरा ने बताया कि समय से पहले बढ़िया क्वालिटी की फसल लेने के लिए उन्होंने प्रूनिंग (काटछांट) तकनीक में बीमों की सही छंटाई की, जिससे फल का आकार बढ़ा। फ्रूट सेटिंग के बाद थिनिंग कर सिर्फ किंग फ्रूट को ही पौधे पर रखा, जिससे फल को ताकत मिली। फूल आने से लेकर फल तुड़ान से 20 दिन पहले तक नियमित अंतराल पर कम मात्रा में बार-बार खाद डाली, जिससे पौधों को बेहतर पोषक तत्व मिले।
इन तीन तकनीकों का प्रयोग कर बगीचे में दो महीने पहले फसल तैयार करने में कामयाब हुए। पवन ने बताया कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों के बगीचों में जहां सेब की परंपरागत किस्में लगी हैं, उन्हें स्पर किस्मों में बदलकर तकनीकों में बदलाव के जरिये समय से पहले फसल तैयार कर बागवान अपनी कमाई बढ़ा सकते हैं। आमतौर पर इतनी ऊंचाई पर तैयार होने वाली यह फसल 20 सितंबर तक बाजार में आती थी, लेकिन इस बार 20 जुलाई को ही बिकने लगी।
ऑर्डर पर लुधियाना भेजे 202 हाफ बॉक्स
पवन डोगरा ने बुधवार को चुग फ्रूट कंपनी लुधियाना के लिए ऑर्डर पर 202 हाफ बॉक्स (10 किलो) भेजे। कंपनी ने प्रति बॉक्स 2000 रुपये भुगतान किया है। बुधवार सुबह मड़ावग से लुधियाना के लिए पिकअप गाड़ी की लोडिंग की गई है।
क्षेत्र के अनुसार बागीचे में सेब की पुरानी किस्मों को जल्दी तैयार होने वाली किस्मों (अर्ली वैरायटी) में बदलकर और फसल तैयार करने की उत्तम तकनीकों का अनुसरण कर बागवान जल्दी फसल तैयार कर लाभ ले सकते हैं।
- डॉ. डीआर शर्मा, उप निदेशक, बागवानी विभाग